सहरसा जिले से पुलिस कार्यशैली पर सवाल खड़े करने वाला एक गंभीर मामला सामने आया है। नौहट्टा थाना क्षेत्र के निवासी मुर्तजा खान ने तत्कालीन थानाध्यक्ष ज्ञानरंजन पर आर्थिक लाभ लेकर उनके खिलाफ फर्जी मुकदमा दर्ज कराने का आरोप लगाया है। पीड़ित का कहना है कि यह मामला न केवल झूठा था, बल्कि अब न्यायालय में आपसी समझौते के बावजूद उन्हें लगातार पुलिसिया दबाव का सामना करना पड़ रहा है।

 

मुर्तजा खान के अनुसार, जिस मामले में उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी, उसमें दोनों पक्षों के बीच आपसी सहमति बन चुकी है और न्यायालय में विधिवत मेलशन यानी समझौता भी दाखिल किया जा चुका है। इसके बावजूद अनुसंधानकर्ता की ओर से लगातार उन्हें डराया-धमकाया जा रहा है। पीड़ित का आरोप है कि पुलिस बार-बार यह कह रही है कि यदि उन्होंने जमानत नहीं कराई, तो उन्हें जेल भेज दिया जाएगा।

 

पीड़ित परिवार का कहना है कि कोर्ट में समझौता हो जाने के बाद भी इस तरह की कार्रवाई समझ से परे है। परिवार के सदस्य न्याय की आस में अधिकारियों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। लगातार पुलिस दबाव के चलते पूरा परिवार मानसिक तनाव से गुजर रहा है। उनका कहना है कि कानून के तहत जब मामला सुलझ चुका है, तो फिर पुलिस की ओर से इस तरह की प्रताड़ना क्यों की जा रही है।

 

इस पूरे मामले ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर कोर्ट में समझौते के बाद भी पुलिस किसके इशारे पर कार्रवाई कर रही है। क्या यह दबाव किसी व्यक्तिगत स्वार्थ का परिणाम है या फिर सिस्टम के भीतर की खामियों को उजागर करता है?

 

पीड़ित मुर्तजा खान ने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि आम लोगों का पुलिस और कानून व्यवस्था से भरोसा न टूटे। फिलहाल यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग निष्पक्ष जांच व न्याय की मांग कर रहे हैं।

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