पटना: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और एयर ट्रैफिक में आई बाधाओं के कारण कई विदेशी नागरिक भारत में फंस गए हैं. इन्हीं में चेक गणराज्य की युवा सेलो वादक मार्गेरिटा क्विनोआ भी शामिल हैं, जिनकी यह मजबूरी अब एक यादगार सांस्कृतिक यात्रा में बदल गई है.
मार्गेरिटा 28 अक्टूबर 2025 को दिल्ली आई थीं, जहां उन्होंने एक म्यूजिक कंपनी के साथ चार महीने के कॉन्ट्रैक्ट पर काम किया. उनका वीजा छह महीने का था और 24 मार्च को उन्हें अपने देश लौटना था. लेकिन युद्ध जैसे हालात के कारण कई फ्लाइट्स रद्द हो गईं और जो उपलब्ध थीं, उनके किराए कई गुना बढ़ गए. दुबई के रास्ते यात्रा को लेकर सुरक्षा चिंताओं के चलते उनके परिवार ने भी मना कर दिया.
ऐसे मुश्किल समय में उनकी मुलाकात बिहार के बिहिया नगर पंचायत अध्यक्ष सचिन कुमार गुप्ता से हुई, जिनकी मदद से उन्हें 24 अप्रैल की फ्लाइट का टिकट मिल सका. इस बीच उन्होंने भारत को करीब से जानने का फैसला किया और बिहार का रुख किया.
मार्गेरिटा ने बनारस का दौरा किया और अब राजगीर, गया और बोधगया घूमने की योजना बना रही हैं. बिहार में उन्होंने गमछा बांधना सीखा और स्थानीय जीवनशैली को करीब से समझा. हालांकि, उन्हें प्रदूषण, सार्वजनिक शौचालयों की कमी और लोगों की नजरों जैसी कुछ चुनौतियों का सामना भी करना पड़ा.
खाने-पीने में लिट्टी-चोखा उनका पसंदीदा बन गया. शुरुआत में मसालेदार भोजन उन्हें अलग लगा, लेकिन अब वे भारतीय स्वाद की आदी हो रही हैं. दूध वाली चाय और लोगों का आत्मीय व्यवहार उनके अनुभव को खास बना रहा है.
उन्होंने रमजान के इफ्तार, चैती छठ और रामनवमी जैसे त्योहारों को भी करीब से देखा. भारतीय संगीत और वाद्ययंत्रों से भी वे काफी प्रभावित हुईं.
मार्गेरिटा कहती हैं कि गंगा किनारे बिताए गए पल उनके लिए सबसे सुकूनभरे रहे. अब वे अपने देश लौटकर भारत, खासकर बिहार के इस अनूठे अनुभव को सभी के साथ साझा करेंगी.
