शादी में दहेज रोड़ा बना तो लड़का और लड़की ने भगाकर शादी का फैसला ले लिया। इसका पता जब परिजनों को चला तो दोनों के परिजन ने सहमति से दोनों की शादी करवा दी। लड़की के पिता का कहना है कि बिटिया की शादी के लिए वर ढूंढ लिया था। कई बार शुभ मुहूर्त निकला, लेकिन शादी नहीं हुई। बार-बार शादी टलने कारण वे समझ नहीं पा रहे थे। जब उसने अपने स्तर से जानकारी हासिल की तो पता चला कि शादी के रास्ते में दहेज अड़चन बना हुआ है।

बताया जा रहा है कि लड़की के पिता रुपये का इंतजाम नहीं कर पा रहे थे। सच्चाई जानकर लड़का हैरत में पड़ गया। फिर उसने बड़ा फैसला लिया। बिना तिलक-दहेज की शादी करने का निर्णय लिया। उसने समाज के लोगों के जरिए पिता को अपने निर्णय से अवगत कराया। साथ ही लड़की वालों तक सूचना भिजवा दिया कि शादी होगी और वह भी बिना किसी प्रकार के लेन-देन का। लड़के के इस फैसले से दोनों पक्ष के लोग पहले तो आश्चर्य में डूबे, फिर शादी को सहमत हो गए। मेसकौर प्रखंड क्षेत्र के सीतामढ़ी स्थित राजवंशी ठाकुरबाड़ी में दोनों का दहेज मुक्त विवाह हुआ।

यह मामला नरहट थाना क्षेत्र के अबगिल निवासी राजकुमार राजवंशी के पुत्र मित्तल राजवंशी की शादी से जुड़ा था। कई माह पूर्व नरहट थाना क्षेत्र के ही राजाबीघा गांव निवासी राजेंद्र राजवंशी की पुत्री सुष्मिता कुमारी के साथ मित्तल की शादी तय हुई थी। परंतु लड़की के परिवार के पास दहेज के लिए पैसा की व्यवस्था नहीं हो पा रहा था। इस कारण शादी टलती जा रही थी। तब लड़का मित्तल ने स्वयं पहलकर शादी करने का निश्चय किया। दोनों पक्षों की मौजूदगी में दहेज मुक्त विवाह हुआ। लड़का के पिता शादी से खुश दिखे। कहा कि दहेज मुक्त शादी होनी चाहिए। बेटे के फैसले पर नाज है।

बता दें फिर प्रेमी जोड़ा ने बताया कि जनवरी के 2016 में लड़की से मोहब्बत हुई थी। एक ही थाना क्षेत्र के थे। धीरे-धीरे प्यार के सिलसिला बढ़ते गया और हम दोनों ने शादी करने को लेकर 2019 में तैयार हो गए थे। 2021 में रिश्ता की बात चली और मोटरसाइकिल के कारण रिश्ता टूट गया। हम लोगों की बेचैनी बढ़ी और भाग कर शादी करने का निर्णय ले लिया, लेकिन इसी बीच मेरे पिता ने हमारी बात मान ली और हम दोनों की विवाह संपन्न कराएं।

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