गोपालपुर, इस्माईलपुर एवं नवगछिया प्रखंड के विभिन्न दियारा क्षेत्रों में गंगा और कोसी नदी की बाढ़ का पानी सूखने के बाद किसानों ने मकई की बुवाई की थी। लेकिन अब फसल पर कीट लगने से किसान भारी परेशानी में हैं।

किसानों का कहना है कि उन्हें पहले से आशंका थी कि बाढ़ के बाद बोई जाने वाली मकई की फसल पर कीट का प्रभाव अधिक पड़ता है, और वही आशंका अब सच साबित हो रही है।


किसानों के अनुसार मकई का पौधा जैसे ही डेढ़ से दो फीट ऊंचा होता है, उसी समय कीट तना में छेद कर पौधे को नुकसान पहुंचा देता है। इस कीट को फाल आर्मी वर्म बताया जा रहा है, जो तेजी से फसल को बर्बाद करता है।

किसान रामचंद्र ठाकुर और घनश्याम कुमार ने बताया कि उनके आधे से अधिक खेतों में लगी मकई की फसल इस कीट के कारण नष्ट हो चुकी है। बचाव के लिए उन्होंने कीटनाशक दवाओं का छिड़काव किया है, लेकिन इसका असर सीमित ही दिख रहा है।


किसानों ने बताया कि इस वर्ष बाजार में मकई का बीज महंगे दाम पर खरीदना पड़ा। इसके बाद खाद, रासायनिक दवाइयों और मजदूरी का खर्च जोड़ने से खेती पहले ही काफी महंगी हो चुकी है। ऐसे में फसल तैयार होने से पहले ही कीट प्रकोप ने उनकी चिंता और बढ़ा दी है।


वहीं कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि फाल आर्मी वर्म को लेकर किसानों को प्रखंड स्तर पर पहले ही जानकारी दी जा चुकी है। बाजार में इसके नियंत्रण के लिए विभिन्न प्रकार की कीटनाशक दवाएं उपलब्ध हैं और सही तरीके से छिड़काव करने पर इस कीट पर काबू पाया जा सकता है।

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