बिहार के जमुई जिले में साइबर फ्रॉड का एक नया मामला सामने आया है, जहां ठगों ने जिले के जिलाधिकारी के नाम और फोटो का फर्जीवाड़ा कर सोशल मीडिया पर फर्जी अकाउंट बना लिया है। इस फर्जी प्रोफाइल के जरिए लोगों से पैसे की मांग की जा रही है, जिससे आम लोगों को शिकार बनाने की कोशिश हो रही है।

पुलिस विभाग के अनुसार, साइबर यह गिरोह लोगों को पहचान दिलाने के लिए शिक्षकों की पहचान का इस्तेमाल कर रहा है। मैसेज में अस्थायी पैसे की मदद या किसी जरूरी काम के लिए डाक टिकट लेने की बात कही जा रही है। कई लोगों को फ्रेंड रिक्वेस्ट भी प्रकाशित किया गया है, जिससे ठग आसानी से संपर्क स्थापित कर सके।

मामले को देखते हुए जिला प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आधिकारिक बयान जारी किया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह सोशल मीडिया अकाउंट पूरी तरह से फर्जी है और इसके माध्यम से किसी भी तरह की दवाओं की मांग की जा रही है और प्रशासन से कोई संबंध नहीं है।

जिला प्रशासन ने आम लोगों से निषेधाज्ञा की अपील की है। लोगों को सलाह दी गई है कि कोई भी अज्ञात या संदिग्ध प्रोफाइल से आए मैसेज, कॉल या दोस्त पर भरोसा न करें। खास तौर पर पैसे से जुड़ी किसी भी मांग को सर्टिफिकेट दें और बिना फाइल के कोई लेन-देन न करें।

जिला रेटिंग ने बताया कि अगर किसी व्यक्ति को इस तरह का संदेश मिलता है, तो वह तुरंत स्थानीय पुलिस या प्रशासन को इसकी सूचना दे। समय रहते याचिका दायर करने से ठगों के खिलाफ कार्रवाई करना आसान होगा और अन्य लोगों को भी गरीबों से लाभ मिलेगा।

प्रशासन ने यह भी बताया कि इस मामले में जांच शुरू हो गई है और साइबर ठगों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही लोगों से अपील की गई है कि इस तरह के समुदायों से बचने के लिए साइंटिस्ट और टीमें भी रुकें।

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