बिहार के गया जिले से एक बेहद चिंताजनक और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है, जिसने मोबाइल गेम की लत और युवाओं में बढ़ती हिंसक प्रवृत्ति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विष्णुपद थाना क्षेत्र के संगम गली में फ्री फायर मोबाइल गेम खेलने से मना करने पर कुछ किशोरों ने एक 60 वर्षीय बुजुर्ग की बेरहमी से पिटाई कर दी, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। इस घटना के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है।
मृतक की पहचान अर्जुन मांझी के रूप में हुई है, जो पेशे से राजमिस्त्री थे। बताया जा रहा है कि अर्जुन मांझी अपने घर के पास मोहल्ले में हो रहे शोर-शराबे से परेशान थे। देर रात कुछ किशोर मोबाइल पर फ्री फायर गेम खेल रहे थे और काफी हल्ला कर रहे थे। इसी बात को लेकर अर्जुन मांझी ने उन्हें टोका और शांति बनाए रखने को कहा।
लेकिन यह बात किशोरों को इतनी नागवार गुजरी कि वे आपा खो बैठे।
प्रत्यक्षदर्शियों और परिजनों के अनुसार, टोकने के बाद चारों किशोरों ने मिलकर अर्जुन मांझी के साथ धक्का-मुक्की शुरू कर दी और फिर मारपीट करने लगे। इस दौरान उनके सिर में गंभीर चोट लगी, जिससे वे जमीन पर गिर पड़े। आसपास के लोगों ने बीच-बचाव करने की कोशिश की, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। उन्हें तुरंत डॉक्टर के पास ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
घटना की सूचना मिलते ही विष्णुपद थाना की पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए मगध मेडिकल कॉलेज अस्पताल भेज दिया गया। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को हिरासत में ले लिया है। बताया जा रहा है कि पकड़े गए दोनों आरोपी नाबालिग हैं, जबकि इस घटना में शामिल दो अन्य किशोर फिलहाल फरार हैं, जिनकी तलाश जारी है।
विष्णुपद थानाध्यक्ष परमानंद लाल कर्ण ने बताया कि, “इस तरह की एक गंभीर घटना सामने आई है। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और मामले की जांच की जा रही है। कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।” पुलिस यह भी जांच कर रही है कि घटना के समय किशोरों के पास कौन-कौन से मोबाइल थे और वे कितनी देर से गेम खेल रहे थे।
मृतक के परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। अर्जुन मांझी की बड़ी बहू रिंकी देवी ने बताया कि मोहल्ले में ये लड़के अक्सर दिन-रात फ्री फायर गेम खेलते रहते थे। उन्होंने कहा, “कल देर रात मेरे ससुर ने बस इतना कहा था कि शोर मत करो। इसी बात पर चारों लड़कों ने मिलकर उन्हें पीटना शुरू कर दिया। सिर में चोट लगने से उनकी जान चली गई।”
यह घटना न केवल कानून-व्यवस्था बल्कि समाज और अभिभावकों के लिए भी एक गंभीर चेतावनी है। मोबाइल गेम की लत किस कदर खतरनाक रूप ले सकती है, इसका यह दुखद उदाहरण है। अब सवाल यह उठता है कि क्या समय रहते बच्चों की गतिविधियों पर ध्यान नहीं दिया गया, और क्या इस तरह की घटनाओं को रोका जा सकता
