बिहार के सहरसा में ईद-उल-फितर का पर्व पूरे उत्साह, उल्लास और आपसी भाईचारे के साथ मनाया गया। शहर के विभिन्न मस्जिदों और ईदगाहों में हजारों की संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोगों ने एक साथ ईद की नमाज अदा की और देश-दुनिया में शांति, भाईचारे और खुशहाली की दुआ मांगी।

सहरसा शहर के मीर टोला स्थित जामा मस्जिद प्रांगण में शनिवार की सुबह से ही नमाजियों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। लोग नए कपड़े पहनकर और पाक-साफ होकर नमाज अदा करने के लिए मस्जिद पहुंचे। निर्धारित समय पर जामा मस्जिद के इमाम मौलाना मुस्तिक साहब ने ईद-उल-फितर की नमाज अदा कराई।

 

नमाज के दौरान हजारों हाथ एक साथ उठे और अल्लाह से अमन-चैन, आपसी प्रेम और समाज में सौहार्द बनाए रखने की दुआ मांगी गई। नमाज खत्म होने के बाद लोगों ने एक-दूसरे को गले लगाकर ईद की मुबारकबाद दी। इस दौरान पूरा माहौल भाईचारे और खुशी से सराबोर नजर आया।

 

इस मौके पर इमाम मौलाना मुस्तिक साहब ने अपने संदेश में कहा कि रमजान का पवित्र महीना सब्र, त्याग और इंसानियत का पाठ पढ़ाता है। ईद का त्योहार हमें यह सिखाता है कि हम आपसी मतभेदों और नफरतों को भुलाकर प्रेम, एकता और भाईचारे के साथ जीवन जिएं।

 

उन्होंने लोगों से समाज में शांति और सौहार्द बनाए रखने की अपील की और कहा कि ईद का असली संदेश जरूरतमंदों की मदद करना और इंसानियत को सर्वोपरि रखना है। साथ ही उन्होंने अल्लाह का शुक्र अदा करने और नेक रास्ते पर चलने का संकल्प लेने की बात कही।

 

ईद के इस पावन अवसर पर सहरसा के विभिन्न इलाकों में भी उत्साह और खुशी का माहौल देखने को मिला। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी ने इस त्योहार को हर्षोल्लास के साथ मनाया, जिससे पूरे क्षेत्र में एकता और भाईचारे की मिसाल देखने को मिली।

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