बिहार में राजस्व सेवा से जुड़े कर्मचारियों की हड़ताल का असर अब अंचल कार्यालयों के कामकाज पर साफ तौर पर दिखाई देने लगा है। अपनी 11 सूत्री मांगों को लेकर कर्मचारी काम से दूर रहकर विरोध जता रहे हैं, जिसके कारण जमीन से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्य प्रभावित हो गए हैं। राज्य के कई जिलों में दाखिल-खारिज, जमाबंदी सुधार, जमीन मापी, परिमार्जन और अन्य राजस्व संबंधी सेवाओं की रफ्तार धीमी पड़ गई है।
अंचल कार्यालयों में काम कराने पहुंचे लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कई जगहों पर लोग घंटों इंतजार करने के बाद भी बिना काम कराए ही वापस लौटने को मजबूर हो रहे हैं। खासकर ग्रामीण इलाकों के लोग, जो जमीन से जुड़े मामलों के लिए पूरी तरह अंचल कार्यालयों पर निर्भर रहते हैं, उन्हें ज्यादा परेशानी उठानी पड़ रही है।
इस बीच बिहार राजस्व सेवा संयुक्त महासंघ के महासचिव रजनीकांत ने कहा कि कर्मचारियों की कई मांगें लंबे समय से लंबित हैं। उन्होंने बताया कि इन मांगों को लेकर कई बार सरकार और विभाग के समक्ष आवाज उठाई गई, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों ने अपनी 11 सूत्री मांगों को लेकर पहले भी ज्ञापन दिया था, लेकिन कार्रवाई नहीं होने के कारण उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा।
वहीं दूसरी ओर बिहार सरकार ने इस हड़ताल को लेकर सख्त रुख अपनाया है। उप मुख्यमंत्री और राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने साफ शब्दों में कहा है कि जनता के काम को बाधित करना किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि कर्मचारी जल्द काम पर नहीं लौटते हैं तो सरकार प्रशासनिक कार्रवाई करने के लिए बाध्य होगी।
विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि सरकारी सेवा में रहते हुए जनता के काम को प्रभावित करना उचित नहीं है। कर्मचारियों को अपनी जिम्मेदारी समझते हुए बिना शर्त हड़ताल समाप्त कर काम पर लौटना चाहिए, अन्यथा सरकार कड़ी कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगी।
फिलहाल एक ओर कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर आंदोलन पर अड़े हुए हैं, वहीं दूसरी ओर सरकार ने कड़ा रुख अपनाया हुआ है। ऐसे में अब देखना होगा कि बातचीत के जरिए इस गतिरोध का समाधान निकलता है या फिर यह टकराव आने वाले दिनों में और लंबा खिंचता है।
