रंगरा प्रखंड के मदरौनी के समीप कटा हुआ रिंग बांध बीते दस वर्षों से नहीं बन पाया है, जिससे तीन पंचायतों के लोगों को हर साल बाढ़ की भीषण त्रासदी झेलनी पड़ रही है। इस वर्ष भी जल संसाधन विभाग के मुख्यालय से कटाव निरोधी कार्य के लिए राशि स्वीकृत नहीं की गई है।

परिणामस्वरूप सधुआ चापर पंचायत, कोसकीपुर सहोड़ा पंचायत और मदरौनी पंचायत के हजारों लोग आगामी बाढ़ को लेकर आशंकित हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार वर्ष 2025 में गोपालपुर क्षेत्र में कटे बांध के निर्माण के लिए राशि स्वीकृत हो गई, लेकिन मदरौनी के पास रिंग बांध निर्माण को फिर नजरअंदाज कर दिया गया।

बाढ़ प्रभावित मनोज सिंह का आरोप है कि क्षेत्र के एमएलसी डॉ. संजीव कुमार सिंह ने अपने घर को बचाने के लिए बोल्डर पिचिंग तो करवा दी, जिसका रखरखाव हर साल होता है, लेकिन तीन पंचायतों को बचाने वाले रिंग बांध के कटे हिस्से को बनाने के लिए कोई ठोस पहल नहीं की गई।


कटा हुआ रिंग बांध हर साल कोसी नदी के बाढ़ के पानी को सीधे गांवों में प्रवेश का रास्ता देता है। जुलाई से अक्टूबर तक सधुआ, चापर, कोसकीपुर सहोड़ा और मदरौनी गांव पूरी तरह जलमग्न रहते हैं। लोगों को आवागमन, रहने, खाने और स्वास्थ्य जैसी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ता है।


स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकार हर साल बाढ़ राहत के नाम पर 30 से 40 करोड़ रुपये खर्च करती है और प्रत्येक प्रभावित परिवार को सात हजार रुपये देती है।

यदि रिंग बांध का कटा हिस्सा बना दिया जाए, तो यह आधी लागत में स्थायी समाधान हो सकता है। रिंग बांध कुरसेला से त्रिमुहान घाट तक प्रस्तावित था, लेकिन मदरौनी के पास जमीन अधिग्रहण और कोर्ट में लंबित मुकदमे के कारण निर्माण अधूरा रह गया।

फिलहाल कटे स्थान पर नदी बह रही है और प्रशासन पिछले दस वर्षों से जमीन की समस्या का समाधान नहीं कर पाया है, जिसका खामियाजा आम जनता भुगत रही है।

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