इंसान की हथेली में रेखाओं को देखकर आने वाले कल का पता चलता है. हर किसी के हाथ में कुछ शुभ और कुछ अशुभ छिपा होता है. लेकिन हस्तरेखा शास्त्र में कुछ ऐसे चिह्नों का जिक्र है, जिन्हें बेहद शुभ माना जाता है. ये चिह्न मछली, झंडे, कमल, मंदिर और स्वास्तिक के रूप में हथेली पर होते हैं. हर भाग्यशाली चिह्न का अपना एक मतलब होता है, चलिए जानते हैं इनके बारे में.

झंडे का चिह्न: अगर एक सीधी लाइन जीवन रेखा या मस्तिष्क रेखा से निकलकर गुरु पर्वत की ओर जाए और दूसरे सिरे पर एक चौरस निशान हो तो इसको हथेली में झंडे का निशान कहा जाता है. ये चिह्न तर्जनी उंगली के नीचे होता है. जिन जातकों की हथेली में ये चिह्न होता है, उनको बुढ़ापे में खूब सुख मिलता है. ये लोग अच्छे लेखक और धार्मिक प्रवृत्ति के होते हैं.   

कमल का चिह्न: ऐसे जातक धार्मिक होने के साथ-साथ पढ़ने-लिखने में बेहद तेज होते हैं.अगर हथेली में हार्ट लाइन से दूसरे सिरे पर मध्यमा और तर्जनी उंगली के नीचे एक त्रिभुज यानी ट्राएंगल नजर आए तो इसको हस्तरेखा शास्त्र में लोटस यानी कमल का निशान कहा जाता है. 

स्वास्तिक का चिह्न: जिनके हाथ में ये चिह्न होता है, ऐसे लोग बड़े दानी होते हैं. इसे भाग्यशाली निशान माना जाता है. ये हाथ में दो जगहों पर बनता है. एक बुध पर्वत पर और दूसरा गुरु पर्वत पर. अगर गुरु पर्वत पर तर्जनी उंगली के नीचे स्वास्तिक बना हो तो व्यक्ति की रुचि धार्मिक कार्यों में बढ़ती है. जबकि जिनके बुध पर्वत के नीचे होती है, ऐसे लोगों को प्रॉपर्टी लाभ होता है. 

मछली का चिह्न: जिनके हाथ में ये निशान होता है वे शांत स्वभाव के होते हैं और दान व धार्मिक कार्यों में आगे रहते हैं. इन्हें पानी से भय लगता है और साइनस की समस्या से जूझते रहते हैं. कुछ लोगों के हाथ में ओवल आकार में चंद्र या केतु पर्वत पर मछली का चिह्न बनता है. ये चिह्न कलाइयों पर बनी रेखा के ठीक नीचे हथेली पर होता है. 

मंदिर का चिह्न: जिन लोगों के हाथ में ये निशान होता है, वे समाज में बहुत मान-सम्मान पाते हैं. इनकी जिंदगी शाही होती है. बेहद कम लोगों के हाथों में ये निशान पाया जाता है. गुरु पर्वत पर तर्जनी उंगली के नीचे एक चौरस डिब्बे के ऊपर त्रिभुजाकार के चिह्न को टेंपल साइन (मंदिर) कहते हैं.

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