बिहार में 2026 के पंचायत चुनाव से पहले परिसीमन को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। पंचायतों की बदलती जनसंख्या के आधार पर नए सिरे से परिसीमन कराने की मांग को लेकर पटना उच्च न्यायालय में याचिका दायर की गई है। यह याचिका मुखिया संघ के प्रदेश अध्यक्ष मिथिलेश कुमार समेत कई पंचायत प्रतिनिधियों ने दाखिल की है। इसमें पंच-सरपंच संघ के प्रादेशिक अध्यक्ष अमोद निराला और जिला परिषद संघ की अध्यक्ष कृष्णा यादव भी शामिल हैं।
याचिका में मांग की गई है कि जिला परिषद, पंचायत समिति और ग्राम पंचायतों का परिसीमन नए सिरे से कराया जाए और यह प्रक्रिया 2026 के पंचायत चुनाव से पहले पूरी की जाए। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि पिछला परिसीमन 1994 में 1991 की जनगणना के आधार पर हुआ था, जबकि अब जनसंख्या में बड़ा बदलाव आ चुका है, इसलिए परिसीमन जरूरी हो गया है।
हालांकि, राज्य सरकार की ओर से इस मांग को लेकर स्पष्ट रुख सामने आ चुका है। पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश ने कहा है कि 2026 के पंचायत चुनाव में नया परिसीमन नहीं किया जाएगा। उन्होंने इसके पीछे 2021 की जनगणना न होने को प्रमुख कारण बताया। मंत्री ने यह जरूर कहा कि आरक्षण के रोस्टर में बदलाव किया जाएगा।
वहीं राज्य निर्वाचन आयोग का कहना है कि 2016 में जो आरक्षण व्यवस्था लागू की गई थी, उसी के आधार पर 2016 और 2021 के चुनाव कराए गए थे। आयोग के अनुसार, 2026 के चुनाव से पहले विभिन्न पदों के लिए आरक्षण प्रक्रिया समय पर पूरी कर ली जाएगी।
परिसीमन का मुख्य उद्देश्य पंचायतों और वार्डों की सीमाओं को जनसंख्या के अनुसार संतुलित करना होता है। इसके जरिए हर वार्ड में समान मतदाता सुनिश्चित किए जाते हैं और अनुसूचित जाति, जनजाति व महिलाओं के लिए आरक्षण तय किया जाता है।
बिहार में वर्तमान में 8053 ग्राम पंचायत, 533 पंचायत समितियां और 38 जिला परिषद हैं। इन पंचायतों में करीब 1.15 लाख वार्ड और कुल 2.48 लाख जनप्रतिनिधि हैं। ऐसे में परिसीमन को लेकर उठा यह मुद्दा आगामी पंचायत चुनाव से पहले अहम बन गया है।
