हाजीपुर के हथिसार गंज में रहने वाले संतोष कुमार ने अपनी अनोखी कला ‘सीटी’ को भक्ति का माध्यम बना दिया है। आज वे इलाके में ‘सीटी के बादशाह’ के नाम से मशहूर हैं। जहां आमतौर पर लोग कला के जरिए प्रसिद्धि पाना चाहते हैं, वहीं संतोष ने इसे साधना और ईश्वर भक्ति से जोड़कर एक अलग पहचान बनाई है।

करीब 50 वर्षीय संतोष बताते हैं कि उनका यह सफर बचपन में रेडियो सुनने से शुरू हुआ। उस समय विविध भारती और की आवाज उन्हें बेहद आकर्षित करती थी। फिल्मों में हीरो द्वारा सीटी बजाने का अंदाज उन्हें इतना पसंद आया कि उन्होंने खुद अभ्यास शुरू कर दिया। धीरे-धीरे उन्होंने सीटी से फिल्मी गानों की धुनें निकालना सीख लिया और उनकी यह कला आसपास के लोगों को मंत्रमुग्ध करने लगी।

समय के साथ उनके जीवन में बड़ा बदलाव आया और उनका रुझान अध्यात्म की ओर हो गया। उन्होंने अपने घर के सामने का एक छोटा मंदिर बनवाया। अब वे अपनी सीटी से फिल्मी गाने नहीं, बल्कि भजन और की धुनें बजाते हैं। हर मंगलवार को वे 108 बार सीटी के जरिए हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं, जिसमें लगभग तीन घंटे लगते हैं।

पारिवारिक जिम्मेदारियों के साथ संतोष ने संतुलन भी बनाए रखा है। वे पेशे से इलेक्ट्रिकल काम करते हैं और स्टेज शो के जरिए लगभग ₹3000 प्रति कार्यक्रम कमाते हैं। लेकिन उनकी असली पहचान उनके दरवाजे पर होने वाले भक्ति संगीत से है।

पिछले 9 वर्षों से हर मंगलवार यहां विशेष आयोजन होता है, जिसमें सात राज्यों तक के कलाकार बिना शुल्क के आकर प्रस्तुति दे चुके हैं। स्थानीय भोजपुरी गायक बबलू तिवारी भी उनकी प्रतिभा की सराहना करते हैं।

संतोष कुमार की कहानी यह बताती है कि सच्ची लगन और श्रद्धा से साधारण सी कला भी ईश्वर आराधना का दिव्य माध्यम बन सकती है।

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