बिहार में पासपोर्ट परीक्षा के परिणाम एक से पहले ही साइबर ठग सक्रिय हो गए हैं। ये जालसाज के छात्र-छात्राएँ फोन करके यह गार्डन बनाने की कोशिश कर रहे हैं कि उनका बेटा या बेटी दो-तीन विषयों में फेल हो रहे हैं। इसके बाद पैसे लेकर फर्स्ट डिवीजन से पास के शेयरधारकों की कोशिश जारी है।
ताजा मामला जिले के चरपोखरी इलाके से सामने आया है। यहां के निवासी आनंद लाइट को एक अज्ञात नंबर से कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को यानी बिहार बोर्ड के स्टाफ को बताया और उनकी बहन के बारे में पूरी जानकारी दी।
आनंद लाइट ने बताया कि 11 मार्च को दोपहर करीब 2 बजे उन्हें फोन आया। कॉल करने वाले व्यक्ति ने अपनी बहन का नाम, माता-पिता का नाम और परीक्षा से जुड़ी कई निजी जानकारी बताईं। इसके बाद उन्होंने कहा कि उनकी बहन की कॉपी जांच के दौरान पता चला कि वह फिजिक्स और केमिस्ट्री में फेल हो रही हैं, जिससे उनका पूरा रिजल्ट खराब हो सकता है।
ठग ने आगे कहा कि अगर कुछ पैसे दिए जाएं तो वह फर्स्ट डिवीजन में परिणाम प्राप्त कर सकता है। जब आनंद प्रकाश ने उनसे मुलाकात की तो उन्होंने ऑफ़लाइन बातचीत करने को कहा। शक होने पर आनंद लाइट ने तुरंत कॉल किया और उससे आगे कोई बातचीत नहीं की।
इस घटना के बाद छात्र डेटा सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठा रहे हैं। ठगों का कहना है कि ठगों के पास छात्रों का मोबाइल नंबर, नाम और परिवार की जानकारी जैसी चीजें पहुंच रही हैं।
ठग बनने पर यह प्लास्टिक दबाव भी टूट जाता है कि कॉपियां जाम का समय कम है, इसलिए तुरंत पैसे अन्य छात्र फेल हो जाएंगे। इस तरह के वायरस से जुड़े लोगों से पैसे ऐंठने की कोशिश की जाती है।
इस मामले में भोजपुर के जिला शिक्षा मानक ने साफ कहा है कि बोर्ड की ओर से किसी भी छात्र या अभिभावक के पास या फेल के नाम पर फोन नहीं किया गया। वे लोगों से बने रहने के लिए कहते हैं और ऐसे कॉल की जानकारी तुरंत पुलिस या साइबर सेल को देते हैं।
