पटना: बिहार की सियासत में मुख्यमंत्री की कुर्सी को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं. माना जा रहा है कि अगर मुख्यमंत्री राज्यसभा जाते हैं तो राज्य में नए मुख्यमंत्री को लेकर फैसला लेना पड़ेगा. ऐसे में भारतीय जनता पार्टी के अंदर दावेदारों की लंबी सूची सामने आने लगी है और कई नेता खुद को संभावित उम्मीदवार के तौर पर देख रहे हैं.
दरअसल, पिछले कुछ वर्षों में ने कई राज्यों में मुख्यमंत्री चयन को लेकर चौंकाने वाले फैसले किए हैं. में और बाद में , में , में , में , में और में को मुख्यमंत्री बनाकर पार्टी ने सभी को चौंका दिया था. इसी वजह से बिहार में भी कई नेता उम्मीद लगाए बैठे हैं.
बीजेपी के अंदर मुख्यमंत्री पद की दावेदारी को लेकर गतिविधियां भी तेज हो गई हैं. पार्टी के कई नेता दिल्ली में सक्रिय हैं और केंद्रीय नेतृत्व से मुलाकात कर आशीर्वाद लेने में जुटे हुए हैं. इसे राजनीतिक गलियारों में “गणेश परिक्रमा” के तौर पर भी देखा जा रहा है.
दावेदारों की सूची में अति पिछड़ा समाज से आने वाले मंत्री का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है. उनके समर्थक सोशल मीडिया पर उन्हें मजबूत दावेदार के रूप में प्रचारित कर रहे हैं. इसके अलावा दीघा विधायक , पूर्व उपमुख्यमंत्री और , विधानसभा स्पीकर और उपमुख्यमंत्री का नाम भी चर्चा में है.
इस बीच बीजेपी के प्रदेश प्रवक्ता ने कहा कि पार्टी में लोकतंत्र है और कोई भी कार्यकर्ता मुख्यमंत्री बनने का सपना देख सकता है. हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री पद को लेकर अंतिम फैसला केंद्रीय नेतृत्व ही करेगा.
वहीं वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक का मानना है कि भले ही बीजेपी ने कई राज्यों में नए चेहरों को मौका दिया हो, लेकिन बिहार में मुख्यमंत्री के चयन में की सहमति भी अहम भूमिका निभाएगी. उनके मुताबिक राज्य की राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए अंतिम फैसला संतुलन बनाकर ही लिया जाएगा.
