सहरसा स्टेडियम के विकास को लेकर अचानक बदली योजना ने खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों में नाराज़गी पैदा कर दी है। पहले इस स्टेडियम को फुटबॉल और एथलेटिक्स ग्राउंड के रूप में विकसित करने की बात कही गई थी, लेकिन अब जारी एक नए पत्र में इसे तीरंदाजी के लिए विकसित करने का प्रस्ताव सामने आया है। इस बदलाव से स्थानीय खिलाड़ियों में आक्रोश है।
सहरसा का यह मैदान लंबे समय से फुटबॉल और एथलेटिक्स का प्रमुख केंद्र रहा है, जहां कई युवा खिलाड़ी रोजाना अभ्यास करते हैं। खिलाड़ियों का कहना है कि इस मैदान से कई प्रतिभाएं उभरी हैं और यह उनके भविष्य से जुड़ा हुआ है।
खिलाड़ी सुरेश कुमार ने बताया कि वे बचपन से इस मैदान पर फुटबॉल खेलते आ रहे हैं। यहां कई खिलाड़ी दौड़ और अन्य खेलों की तैयारी करते हैं। ऐसे में अचानक तीरंदाजी के लिए स्टेडियम विकसित करने की बात से सभी खिलाड़ी निराश और आक्रोशित हैं। उन्होंने कहा कि इस फैसले के खिलाफ उन्होंने जिलाधिकारी को आवेदन देकर अपनी मांग रखी है।
वहीं खेल प्रेमी रोशन सिंह धोनी ने कहा कि सहरसा ही नहीं बल्कि पूरे कोसी क्षेत्र में तीरंदाजी का कोई खास आधार नहीं है। यहां के बच्चे फुटबॉल और एथलेटिक्स में बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं। उन्होंने प्रशासन से अपील की है कि स्टेडियम को उन्हीं खेलों के लिए विकसित किया जाए, जिनसे स्थानीय खिलाड़ियों का भविष्य जुड़ा है।
खिलाड़ियों ने इस फैसले को लेकर सवाल उठाते हुए इसे किसी अन्य कारण या दबाव में लिया गया निर्णय बताया है। उनका कहना है कि यदि इस योजना को लागू किया गया तो कई खिलाड़ियों का भविष्य प्रभावित होगा।
फिलहाल सभी की नजर प्रशासन के फैसले पर टिकी है। खिलाड़ियों को उम्मीद है कि उनकी मांग को गंभीरता से लिया जाएगा और स्टेडियम को पहले की योजना के अनुसार फुटबॉल और एथलेटिक्स के लिए ही विकसित किया जाएगा।
