झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन ने विस्थापन के मुद्दे पर बड़ा बयान देते हुए बोकारो स्टील प्लांट प्रबंधन को कड़ा अल्टीमेटम दिया है। बोकारो दौरे के दौरान उन्होंने कहा कि अगर डेढ़ महीने के भीतर विस्थापितों को न्याय नहीं मिला, तो एक व्यापक और जोरदार आंदोलन शुरू किया जाएगा।
सेक्टर-11 में आयोजित प्रेम महतो के शहादत दिवस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए चंपई सोरेन ने कहा कि झारखंड में विस्थापन आज भी एक गंभीर समस्या बनी हुई है। उन्होंने बताया कि वर्ष 1960-62 में Bokaro Steel Plant के निर्माण के लिए हजारों लोगों को उनकी जमीन से विस्थापित किया गया था, लेकिन 60 साल बीत जाने के बावजूद उन्हें उनका हक और अधिकार नहीं मिल सका है।
उन्होंने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि यदि तय समय सीमा के भीतर कोई ठोस पहल नहीं हुई, तो विस्थापित परिवार हल-बैल और ट्रैक्टर के साथ खाली पड़ी जमीन पर कब्जा करेंगे। उन्होंने कहा, “झारखंड में लाखों परिवार आज भी विस्थापन का दर्द झेल रहे हैं। अगर उन्हें न्याय नहीं मिला, तो हम सड़क से लेकर जमीन तक आंदोलन करेंगे।”
चंपई सोरेन ने यह भी बताया कि बोकारो स्टील प्लांट के लिए लगभग 31 हजार एकड़ जमीन अधिग्रहित की गई थी, लेकिन वर्तमान में केवल करीब 8 हजार एकड़ भूमि का ही उपयोग हो रहा है। शेष जमीन को रैयतों को वापस किए जाने की मांग करते हुए उन्होंने सरकार और प्लांट प्रबंधन दोनों पर सवाल खड़े किए।
उन्होंने कहा कि यह सिर्फ जमीन का मामला नहीं, बल्कि लोगों के अधिकार, सम्मान और भविष्य से जुड़ा मुद्दा है। विस्थापितों के साथ वर्षों से हो रहे अन्याय को अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
इस दौरान बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और विस्थापित परिवार मौजूद रहे, जिन्होंने अपनी समस्याएं साझा कीं और आंदोलन के समर्थन में आवाज बुलंद की।
