देश और दुनिया में बढ़ते तनाव का असर अब आम लोगों की जेब पर साफ दिखने लगा है। सीमेंट और रेत यानी बालू के दामों में भारी उछाल आया है, जिससे घर बनाना अब पहले से कहीं ज्यादा महंगा हो गया है।
मध्य-पूर्व में जारी संघर्ष और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में आई बाधा का सीधा असर निर्माण सामग्री पर पड़ा है। ईंधन संकट और ट्रांसपोर्ट महंगा होने की वजह से सीमेंट और रेत की कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है।
बाजार के जानकारों के मुताबिक, पिछले कुछ हफ्तों में सीमेंट के दामों में करीब 10 से 15 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। कई इलाकों में सप्लाई भी प्रभावित हुई है, जिससे बाजार में कमी का माहौल बना हुआ है।
वहीं, रेत यानी बालू के दाम भी लगातार बढ़ रहे हैं। पहले जो रेत करीब 105 रुपये प्रति कुंतल मिल रही थी, अब वह बढ़कर 110 रुपये या उससे अधिक तक पहुंच गई है। यही नहीं, बजरी और रोड़ी की कीमतों में भी इजाफा देखा जा रहा है।
ट्रांसपोर्ट लागत बढ़ने से इन सभी सामग्रियों की कीमतों पर सीधा असर पड़ा है। डीजल और पेट्रोल के बढ़ते दामों ने निर्माण सामग्री को और महंगा कर दिया है।
स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि यदि हालात ऐसे ही बने रहे, तो आने वाले समय में कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है। इसका सबसे ज्यादा असर आम लोगों और छोटे निर्माण कार्यों पर पड़ रहा है।
कई लोगों ने बढ़ती लागत के कारण अपने मकान निर्माण का काम फिलहाल रोक दिया है या टाल दिया है। इससे निर्माण क्षेत्र में भी सुस्ती देखी जा रही है।
विशेषज्ञों की मानें तो जब तक अंतरराष्ट्रीय हालात सामान्य नहीं होते, तब तक सीमेंट और रेत की कीमतों में राहत मिलना मुश्किल है। ऐसे में आम लोगों के लिए अपना घर बनाना एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।
