बिहार के सहरसा जिले में शुक्रवार को उस समय हड़कंप मच गया जब केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की एक टीम ने जिले के मुख्य डाकघर में छापा मारा। यह कार्रवाई एक गुप्त सूचना के आधार पर की गई थी, जिसमें बताया गया था कि डाकघर का एक कर्मचारी रिश्वत की मांग कर रहा है। जांच के दौरान CBI ने पोस्टल असिस्टेंट संजीत कुमार को रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, आरोपी संजीत कुमार एक सरकारी कर्मचारी की पांच महीने से लंबित सैलरी रिलीज करने के बदले ₹10,000 की रिश्वत मांग रहा था। शिकायतकर्ता ने इस बारे में CBI को सूचित किया। योजना के तहत पहले किश्त के रूप में ₹5,000 की राशि जैसे ही संजीत कुमार ने ली, CBI टीम ने उसे मौके पर ही धर दबोचा। इस पूरी कार्रवाई का नेतृत्व CBI के पुलिस अवर निरीक्षक प्रसांत कुमार ने किया।
CBI की इस कार्रवाई से डाकघर के पूरे विभाग में हड़कंप मच गया है। एक तरफ जहां आम लोग डाकघर को भरोसेमंद संस्थान मानते हैं, वहीं इस तरह की घटना से विभाग की छवि को गहरा धक्का पहुंचा है। स्थानीय लोगों और कर्मचारियों के बीच इस गिरफ्तारी को लेकर चर्चा का माहौल बना हुआ है।
CBI ने आरोपी संजीत कुमार के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। उसे पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है और प्रारंभिक पूछताछ में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। बताया जा रहा है कि यह आरोपी पिछले कई महीनों से सैलरी रिलीज में अनावश्यक देरी कर कर्मचारियों पर दबाव बनाता था और बदले में पैसे की मांग करता था।
डाक विभाग के अन्य कर्मचारियों से भी पूछताछ की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं इस गड़बड़ी में कोई और अधिकारी या कर्मचारी भी शामिल तो नहीं है। मामले की जांच गहराई से की जा रही है और CBI यह जानने की कोशिश कर रही है कि क्या यह कोई एकल मामला है या फिर इसमें भ्रष्टाचार का कोई बड़ा नेटवर्क शामिल है।
सहरसा डाकघर में हुई इस कार्रवाई से एक बार फिर यह साफ हो गया है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ CBI की मुहिम लगातार जारी है और किसी भी स्तर पर भ्रष्ट आचरण को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
इस घटना से अन्य विभागों को भी यह संदेश गया है कि भ्रष्टाचार में लिप्त कोई भी कर्मचारी अब कानून की पकड़ से बच नहीं सकता। CBI की आगे की कार्रवाई पर अब पूरे जिले की नजरें टिकी हुई हैं।
