राज्य सरकार 11 अप्रैल से सरकारी स्कूलों में बच्चों को पाठ्य पुस्तक बांटेगी। इसके लिए 11 अप्रैल से पूरे प्रदेश में पुस्तकोत्सव मनाया जाएगा। इसके तहत पहली से आठवीं के बच्चों के बीच किताबें बांटी जाएंगी। इसकी जानकारी शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह ने ट्वीट कर दी। इसमें उन्होंने कहा है

कि बच्चों के बीच किताब बांटने के लिए 11 अप्रैल से पुस्तकोत्सव मनाया जाएगा। उन्होंने सभी अभिभावकों, जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से इस पुस्तकोत्सव में शामिल होने का अनुरोध भी किया है।

राज्य सरकार ने पांच वर्षों के बाद बच्चों को फिर से पाठ्य पुस्तक देने जा रही है। इसके पहले अपर मुख्य सचिव ने गुरुवार को दिन में सभी जिलों के जिला शिक्षा पदाधिकारियों के साथ वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक कर पुस्तक वितरण योजना की समीक्षा की।

इसमें उन्होंने सभी जिलों में शुक्रवार से पुस्तक पहुंचाने का भी टास्क सौंपा है। उन्होंने अधिकारियों को हर हाल में 11 अप्रैल से सरकारी स्कूलों में पुस्तक का वितरण सुनिश्चित करने की भी हिदायत दी। विभाग पहले ही सरकारी स्कूलों में 11 से 15 अप्रैल के बीच पुस्तक वितरण की योजना बना चुकी है। अपर मुख्य सचिव ने सुस्ती पर कार्रवाई की भी चेतावनी दी है।

इस साल विभाग बच्चों को पैसे के बदले किताबें दे रहा है। पिछले वर्ष तक बच्चों को किताबों के बदले पैसे दिये जा रहे थे। वर्ष 2018 में राज्य सरकार ने वर्ग 1-8 तक के बच्चों को किताब के बदले पैसे देना शुरू किया था।

इसके तहत 1-4 तक के बच्चों को 250 रुपए जबकि 5 से 8 के बच्चों को 400 रुपए दिये गये। लेकिन, इसका परिणाम और खराब आया। अधिसंख्य बच्चों ने पैसा मिलने के बाद भी पुस्तक नहीं खरीदी। पिछले चार वर्षों में बच्चों ने अधिकतम 30-35 फीसदी किताबें ही खरीदी। पहले साल 13 फीसदी, दूसरे साल 19, तीसरे साल 11 फीसदी बच्चों ने ही किताबें खरीदी।

जबकि, इस दौरान बच्चों के खाते में 1600 करोड़ रुपए भेजे गए। इस परिणाम से सरकार चिंतित थी। विभाग ने माना कि इससे अच्छी-खासी धनराशि खर्च करने के बाद भी बच्चों की पढ़ाई नहीं हो पाएगी। लिहाजा, योजना में बदलाव करते हुए 1-8 वीं तक के पौन दो करोड़ बच्चों को पैसे के बदले किताब ही देने का निर्णय लिया गया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *