बिहार के गया में इस बार पर्यटन सीजन फीका पड़ गया है। अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का सीधा असर यहां के पर्यटन उद्योग पर देखने को मिल रहा है। मार्च-अप्रैल, जो आमतौर पर विदेशी पर्यटकों से गुलजार रहते थे, इस बार लगभग खाली नजर आ रहे हैं।

स्थानीय टूरिस्ट गाइड और होटल व्यवसायियों के अनुसार, अप्रैल 2026 में 500 से भी कम विदेशी पर्यटक पहुंचे, जबकि सामान्य वर्षों में यह संख्या 5000-6000 तक रहती थी। मार्च में भी करीब 4000 पर्यटक ही आए, जबकि पहले यह आंकड़ा 10 हजार के पार होता था। खाड़ी देशों में तनाव और उड़ानों के महंगे होने के कारण विदेशी पर्यटक यात्रा से बच रहे हैं।

महाबोधि मंदिर, जो बौद्ध धर्म का प्रमुख तीर्थ स्थल है, वहां भी पहले जैसी भीड़ नहीं दिख रही। पर्यटकों की कमी से होटल, रेस्टोरेंट, ट्रैवल एजेंसियां और स्थानीय दुकानदार सभी प्रभावित हैं। 4000-6000 रुपये वाले होटल रूम अब 2000 रुपये में भी खाली पड़े हैं।

टूरिस्ट गाइड्स के मुताबिक, 1 अप्रैल से (1 मई 2026) के बीच आने वाले कई ग्रुप्स ने अपनी बुकिंग कैंसिल कर दी है। पिछले 10 दिनों में 50 से अधिक ग्रुप्स, यानी करीब 1000 पर्यटकों ने यात्रा रद्द की है। डर यह है कि कहीं युद्ध बढ़ने पर वे दूसरे देश में फंस न जाएं।

गया अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट से भी अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में भारी कमी आई है। म्यांमार, भूटान और थाईलैंड से आने वाली फ्लाइट्स घटकर सप्ताह में 2-3 रह गई हैं और 20 अप्रैल के बाद इनके भी बंद होने की संभावना है।

स्थानीय कारोबारियों का कहना है कि सिर्फ दो महीनों में 70 से 80 करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है। होटल, गाड़ियां और दुकानें खाली पड़ी हैं, जिससे रोजगार पर भी असर पड़ा है।

अगर हालात जल्द सामान्य नहीं हुए, तो बुद्ध पूर्णिमा जैसे बड़े अवसर पर भी विदेशी पर्यटकों की संख्या कम रह सकती है। बोधगया से अब यही संदेश दिया जा रहा है कि दुनिया में शांति बहाल हो, ताकि पर्यटन और आजीविका दोनों फिर पटरी पर लौट सकें।

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