पटना की मिट्टी से जुड़ाव सिर्फ बिहार की सीमाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भावना सात समंदर पार भी उतनी ही गहरी है। इसका अनोखा उदाहरण कनाडा के विन्निपेग शहर में रहने वाले पटना के युवक बशार हबीबुल्लाह ने पेश किया है, जिन्होंने विदेश में रहकर भी अपनी पहचान ‘बिहार’ और ‘पटना’ से जोड़े रखी है।

बशार हबीबुल्लाह ने अपनी गाड़ियों के लिए कस्टमाइज्ड नंबर प्लेट में ‘BIHAR’ और ‘PATNA’ लिखवाया है। कनाडा में ‘वैनिटी लाइसेंस प्लेट’ के जरिए लोग अपनी पसंद के नाम या शब्द को नंबर प्लेट पर दर्ज करवा सकते हैं। बशार ने भी इसी सुविधा का इस्तेमाल करते हुए अपनी जड़ों को सम्मान दिया।

बशार ने बताया कि जब वे कनाडा पहुंचे, तो उन्होंने कई गाड़ियों पर ‘Punjab’ लिखा देखा। इससे उन्हें प्रेरणा मिली कि वे भी अपनी पहचान को इसी तरह प्रदर्शित करें। उन्होंने कहा कि शुरुआत में वे वहां अकेले थे और किसी को नहीं जानते थे। ऐसे में उन्होंने सोचा कि ‘BIHAR’ नाम की नंबर प्लेट बिहारी लोगों को जोड़ने का एक बेहतर माध्यम बन सकती है।

बशार ने अपनी पहली गाड़ी के लिए ‘BIHAR’ नंबर प्लेट कस्टमाइज करवाई, जिसके लिए उन्हें करीब 100 डॉलर अतिरिक्त खर्च करने पड़े। दिलचस्प बात यह रही कि यह नंबर उन्हें आसानी से मिल गया, क्योंकि इससे पहले किसी ने इसके लिए आवेदन नहीं किया था। बाद में उन्होंने दूसरी गाड़ी ली, जिसमें ‘PATNA’ नाम की नंबर प्लेट ली।

बशार का कहना है कि उनकी इस पहल से उन्हें कनाडा में कई बिहारी मूल के लोगों से जुड़ने का मौका मिला। इसी नंबर प्लेट के जरिए उनकी मुलाकात पटना की पल्लवी सिंह और सिवान के इम्तियाज जैसे लोगों से हुई।

वे कहते हैं, “मैं भले ही कनाडा में रहता हूं, लेकिन मेरी पहचान हमेशा पटना और बिहार से ही रहेगी। मेरे पासपोर्ट में भी पटना दर्ज है और मेरी गाड़ी पर भी पटना लिखा है। यह मेरी मिट्टी के प्रति सम्मान का प्रतीक है।”

बशार की यह पहल न सिर्फ बिहारियत को जीवित रखने का संदेश देती है, बल्कि विदेशों में बसे भारतीयों के लिए अपनी जड़ों से जुड़े रहने की प्रेरणा भी बन रही है।

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