बिहार में भागलपुर जिला अपनी विशिष्ट पहचान के लिए जाना जाता है। राज्य में भागलपुर एकमात्र ऐसा जिला है, जहां चार उत्पादों को जीआई टैग प्राप्त है। इनमें जर्दालु आम, कतरनी धान, तसर सिल्क और मंजूषा पेंटिंग शामिल हैं। इन जीआई टैग प्राप्त उत्पादों की गुणवत्ता, उत्पादन और बाजार विस्तार को लेकर जिला प्रशासन ने अब ठोस पहल शुरू कर दी है।
इसी क्रम में भागलपुर के जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी ने जिले के जर्दालु आम उत्पादक किसानों, कतरनी धान उत्पादक किसानों, तसर सिल्क से कपड़ा तैयार करने वाले बुनकरों तथा मंजूषा पेंटिंग से जुड़े कलाकारों के साथ एक अहम बैठक आयोजित की। बैठक का उद्देश्य जीआई टैग उत्पादों को बेहतर पहचान दिलाने के साथ-साथ इनके उत्पादन को वैज्ञानिक तरीके से बढ़ाना और मजबूत मार्केटिंग लिंक तैयार करना रहा।
बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने कहा कि जीआई टैग केवल पहचान तक सीमित न रहे, बल्कि इससे जुड़े लोगों की आय में भी बढ़ोतरी होनी चाहिए। उन्होंने किसानों और कारीगरों से उनकी समस्याओं, उत्पादन में आ रही चुनौतियों और बाजार तक पहुंच को लेकर विस्तार से जानकारी ली। साथ ही अधिकारियों को निर्देश दिया कि इन उत्पादों की ब्रांडिंग, पैकेजिंग और ऑनलाइन व ऑफलाइन मार्केटिंग की संभावनाओं पर गंभीरता से काम किया जाए।
जिलाधिकारी ने बताया कि बिहार सरकार और केंद्र सरकार का बजट आने वाला है। ऐसे में भागलपुर के चारों जीआई टैग उत्पादों को लेकर एक मजबूत और व्यावहारिक प्रपोजल तैयार किया जा रहा है, जिसे राज्य सरकार और केंद्र सरकार के समक्ष भेजा जाएगा। इस प्रपोजल के माध्यम से भविष्य में जर्दालु आम, कतरनी धान, तसर सिल्क और मंजूषा पेंटिंग आधारित उद्योगों की स्थापना का मार्ग प्रशस्त किया जाएगा।
बैठक में यह भी चर्चा की गई कि यदि इन उत्पादों पर आधारित लघु और मध्यम उद्योग विकसित होते हैं, तो इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे और भागलपुर की पहचान राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और मजबूत होगी।
जिला प्रशासन की इस पहल से किसानों, बुनकरों और कलाकारों में नई उम्मीद जगी है। उन्हें भरोसा है कि आने वाले समय में जीआई टैग उत्पाद भागलपुर की आर्थिक मजबूती का मजबूत आधार बनेंगे।
