भागलपुर संग्रहालय को अब उसका नया आधिकारिक लोगो मिल गया है। इस प्रतीक चिन्ह को संग्रहालय प्रशासन द्वारा तैयार किया गया है, जिसे कला एवं संस्कृति विभाग, पटना की ओर से विभागीय स्वीकृति भी मिल चुकी है। यह लोगो अंग क्षेत्र की प्राचीन कला, संस्कृति और ऐतिहासिक विरासत को दर्शाने का प्रयास करता है।
जानकारी के अनुसार, भागलपुर संग्रहालय का यह आधिकारिक लोगो अंकित रंजन, जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी-सह-सहायक संग्रहालयाध्यक्ष, भागलपुर संग्रहालय द्वारा डिज़ाइन किया गया है। इस लोगो को कला एवं संस्कृति विभाग, पटना के संग्रहालय निदेशालय द्वारा पत्रांक 89, दिनांक 17 फरवरी 2026 के माध्यम से विभागीय स्वीकृति प्रदान की गई है। इसके साथ ही अब यह लोगो संग्रहालय का आधिकारिक प्रतीक चिन्ह बन गया है।
लोगो की खास बात यह है कि इसमें भागलपुर संग्रहालय में संरक्षित ब्लैक बेसाल्ट के एकाश्म स्तंभ पर उकेरी गई प्राचीन आकृति को दर्शाया गया है। इस आकृति में एक व्यक्ति पारंपरिक वेशभूषा में वाद्य यंत्र बजाते हुए दिखाई देता है और उसकी धुन पर आनंद से झूमता हुआ प्रतीत होता है। इसके चारों ओर बेल-बूटों का आकर्षक अलंकरण भी बनाया गया है, जो उस काल की कलात्मक शैली को दर्शाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, पत्थर पर उकेरी गई यह पाल कालीन कला अंग क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा और कलात्मकता का महत्वपूर्ण प्रमाण है। इस प्रतीक चिन्ह के माध्यम से संग्रहालय ने न केवल अपनी पहचान को नया स्वरूप दिया है, बल्कि अंग भूमि की प्राचीन कला और संस्कृति को भी एक प्रतीकात्मक रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास किया है।
संग्रहालय प्रशासन का मानना है कि यह लोगो दर्शकों और शोधकर्ताओं को अंग क्षेत्र की ऐतिहासिक धरोहर से जोड़ने का काम करेगा। साथ ही यह भी संदेश देता है कि अंग भूमि प्राचीन काल से ही कला, संस्कृति और परंपराओं के प्रति जागरूक और समृद्ध रही है।
अब इस नए लोगो का उपयोग भागलपुर संग्रहालय से जुड़े सभी आधिकारिक दस्तावेजों, प्रकाशनों और प्रचार सामग्री में किया जाएगा, जिससे संग्रहालय की एक विशिष्ट पहचान स्थापित हो सकेगी।
