भागलपुर जिले के जगदीशपुर प्रखंड में भूमिहीन परिवारों की पीड़ा अब भी जस की तस बनी हुई है। वर्ष 2023 में भागलपुर जिला प्रशासन द्वारा कुछ भूमिहीन परिवारों को बसने के लिए पर्चा दिया गया था। लेकिन तीन साल बीत जाने के बावजूद इन परिवारों को अब तक पक्के आशियाने नहीं मिल पाए हैं। मजबूरी में ये परिवार झुग्गी-झोपड़ी बनाकर जीवन यापन कर रहे हैं।

 

भूमिहीन परिवारों का आरोप है कि न तो उन्हें स्थायी आवास प्रदान किया गया है और न ही किसी वैकल्पिक व्यवस्था की गई है। इसके बावजूद प्रखंड विकास पदाधिकारी और अंचलाधिकारी द्वारा उन्हें झुग्गी-झोपड़ी खाली करने और इलाके से हटने की धमकी दी जा रही है। इससे परिवारों में भय और असंतोष का माहौल व्याप्त हो गया है। पीड़ित परिवारों का कहना है कि पहले उनका पुनर्वास किया जाए, उसके बाद ही किसी तरह की कार्रवाई की जाए।

 

इस मामले को लेकर भाजपा झुग्गी-झोपड़ी प्रकोष्ठ के जिला अध्यक्ष शंकर गुप्ता ने जिला प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2023 में ही इन भूमिहीन परिवारों को बसने के लिए पर्चा दिया गया था, लेकिन आज तक उनका पुनर्वास नहीं किया गया। शंकर गुप्ता ने स्पष्ट किया कि यह न केवल एक सामाजिक समस्या है, बल्कि प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाती है।

 

शंकर गुप्ता ने बताया कि इस गंभीर समस्या को 5 जनवरी को भागलपुर में आयोजित होने वाले उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा के जन संवाद कार्यक्रम में उठाया जाएगा। उनका कहना है कि सरकार और प्रशासन को इन भूमिहीन परिवारों को उनके हक और सम्मानजनक जीवन दिलाने के लिए तुरंत कदम उठाने की आवश्यकता है।

 

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते इन परिवारों का पुनर्वास नहीं किया गया, तो यह क्षेत्र में सामाजिक असंतोष बढ़ाने का कारण बन सकता है। ऐसे में प्रशासन की जिम्मेदारी बनती है कि वह भूमि रहित परिवारों को प्राथमिकता के आधार पर स्थायी आवास उपलब्ध कराए और उन्हें सुरक्षित जीवन प्रदान करे।

 

यह मामला यह दर्शाता है कि शासन-प्रशासन की योजनाओं की जमीन पर अमल की गति और पारदर्शिता कितनी महत्वपूर्ण है, ताकि कोई भी नागरिक अपने हक से वंचित न रह जाए।

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