उत्तराखंड की महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्य के पति गिरधारी लाल साहू के हालिया बयान ने देश के राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। इस बयान का विरोध अब बिहार के भागलपुर में भी तेज़ी से देखने को मिल रहा है, जहां बड़ी संख्या में महिलाओं ने कड़ा आक्रोश जताया है। महिलाओं का कहना है कि यह बयान न सिर्फ बिहार की महिलाओं का अपमान है, बल्कि यह महिलाओं को एक वस्तु के रूप में देखने वाली घृणित और पिछड़ी सोच को भी उजागर करता है।
भागलपुर में विरोध जता रहीं महिलाओं ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ऐसे बयान समाज में महिलाओं के सम्मान, स्वाभिमान और समानता की भावना को गहरी ठेस पहुंचाते हैं। उनका कहना है कि सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों को यह समझना चाहिए कि उनके शब्दों का समाज पर व्यापक प्रभाव पड़ता है। इस तरह की बयानबाजी महिलाओं के खिलाफ मानसिक हिंसा को बढ़ावा देती है और पितृसत्तात्मक सोच को मजबूत करती है।
प्रदर्शन कर रही महिलाओं ने कहा कि आज महिलाएं हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं, फिर भी इस तरह के बयान यह साबित करते हैं कि कुछ लोग अब भी महिलाओं को बराबरी का दर्जा देने के लिए तैयार नहीं हैं। महिलाओं ने सवाल उठाया कि जब एक महिला मंत्री के परिवार से ऐसा बयान आता है, तो यह और भी दुर्भाग्यपूर्ण है और सरकार की महिला सशक्तिकरण की सोच पर भी सवाल खड़े करता है।
महिलाओं ने मांग की कि गिरधारी लाल साहू के बयान की सार्वजनिक रूप से निंदा की जाए और इस मामले में सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति इस तरह की भाषा का प्रयोग करने से पहले सौ बार सोचे। उन्होंने यह भी कहा कि यदि ऐसे मामलों में चुप्पी साधी गई या केवल औपचारिक प्रतिक्रिया देकर बात को दबा दिया गया, तो यह समाज को गलत संदेश देगा और ऐसे लोगों का मनोबल बढ़ेगा।
भागलपुर की महिलाओं ने एक स्वर में कहा कि वे अपने सम्मान के साथ कोई समझौता नहीं करेंगी और महिलाओं के खिलाफ किसी भी तरह की अपमानजनक सोच का पुरजोर विरोध करती रहेंगी। उन्होंने सरकार और राजनीतिक दलों से अपेक्षा जताई कि महिलाओं के सम्मान की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाए जाएं और केवल नारों तक सीमित न रहा जाए।
