बिहार की राजनीति में एक बड़ी घटना सामने आई है, जहां बांका से सांसद गिरिधारी यादव की नामांकन पर खतरा मंडराने लगा है। जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) ने अपने सख्त रुख के खिलाफ अपनाते हुए पद छोड़ने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। पार्टी ने उन पर लगातार पार्टी विरोधी गुट में रहने का आरोप लगाया है।
इस मामले को लेकर सुपौल से न्यूनतम दिलेश्वर कामत ने नॉमिनल स्पाइसर को अप्लाई किया है, जिसमें गिरिधारी यादव की नियुक्ति रद्द करने की मांग की गई है। दिलेश्वर कामत का कहना है कि गिरिधारी यादव ने पार्टी लाइन के समर्थकों के खिलाफ कई बयान दिए हैं और ऐसे कदम उठाए हैं जो निर्देश के खिलाफ हैं।
सबसे बड़ा विवाद तब सामने आया जब गिरिधारी यादव ने एस ताकतवर से जुड़े एक अहम फैसले को ‘तुगलकी लड़ाई’ के बारे में बताया। उनकी इस बात को पार्टी नेतृत्व ने नामांकित किया और इसे अनुशासनहीनता माना। इसके अलावा उन पर आरोप है कि उन्होंने विधानसभा चुनाव के दौरान अपने बेटे चानक प्रकाश रंजन को जजों के टिकट पर चुनाव लड़वाया और अपने पक्ष में प्रचार भी किया।
राजनीतिक समीकरणों का मानना है कि कभी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के करीबी रहे गिरिधारी यादव और पार्टी नेतृत्व के बीच अब दूरियां नजर आने लगी हैं। हाल ही में 17 मार्च को बांका में आयोजित मुख्यमंत्री की समृद्धि यात्रा के कार्यक्रम में उनकी गैरमौजूदगी में भी कई सवाल पूछे गए थे।
पार्टी ने सबसे पहले उन्हें नोटिस जारी कर 15 दिनों में जवाब मांगा था। हालाँकि अब मामला बढ़ता हुआ उनकी संसदीय संस्थाओं तक पहुँच गया है। इस पूरे घटनाक्रम पर केंद्रीय मंत्री ललन सिंह ने कहा कि अंतिम निर्णय पार्टी का अध्यक्ष ही लेगा।
वहीं, डेमोक्रेट सांसद संजय कुमार झा ने भी साफ कहा कि यह केस पार्टी की छुट्टी है, क्योंकि गिरिधारी यादव ने खुलेआम डेमोक्रेटिक पार्टी का समर्थन किया है।
अब एसोसिएट्स नजरें, एसोसिएट और सहयोगी नेतृत्व के अंतिम फैसले पर टिकी हैं, जो आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति की दिशा तय कर सकते हैं।
