बिहार के भोजपुर जिले के कोइलवर प्रखंड अंतर्गत बहियारा गांव में दक्षिण भारतीय स्थापत्य कला पर आधारित भव्य श्री बालाजी नरसिंह मंदिर बनकर तैयार हो गया है। सोन नदी के तट पर स्थित यह मंदिर राज्य में अपनी तरह का पहला मंदिर माना जा रहा है, जिसे तिरुपति बालाजी मंदिर की तर्ज पर बनाया गया है। करीब 10 से 11 करोड़ रुपये की लागत से महज 10-11 महीनों में इसका निर्माण पूरा किया गया है।

मंदिर के निर्माण से पूरे क्षेत्र में धार्मिक उत्साह का माहौल है और श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखा जा रहा है। गुरुवार से यहां पूजा-पाठ की शुरुआत हो चुकी है। मूलविग्रह स्थापना के साथ प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव का शुभारंभ वैदिक रीति-रिवाजों के साथ किया गया। इस दौरान मृत्तिका संग्रह, यज्ञशाला प्रवेश, अंकुरार्पण, वेद पाठ, होम और पूर्णाहुति जैसे कई धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए।

मंदिर परिसर में श्री तिरुपति बालाजी, श्री गणपति, बजरंग बली, गरुड़ जी, महालक्ष्मी, लक्ष्मी नरसिंह और राम दरबार सहित कई देवी-देवताओं की भव्य प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं। इन प्रतिमाओं का निर्माण कृष्ण शिला पत्थर से किया गया है, जिनमें कुछ मूर्तियां महाबलीपुरम से बनवाई गई हैं, जबकि मुख्य विग्रह प्रसिद्ध शिल्पकार द्वारा तैयार किया गया है।

इस अवसर पर महंत स्वामी सम्भवाचार्य महाराज ने कहा कि यह मंदिर केवल आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने का माध्यम बनेगा। उन्होंने इस पवित्र स्थल को ‘बैकुंठ धाम’ नाम देने की घोषणा की और इसे मिथिला और द्रविड़ संस्कृति के अद्भुत संगम का प्रतीक बताया।

मंदिर के निदेशक अजय सिंह ने बताया कि इसका शिलान्यास पिछले वर्ष 31 मार्च को हुआ था और इसे रिकॉर्ड समय में पूरा कर लिया गया। उन्होंने कहा कि यह मंदिर धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा देगा।

आगामी 12 अप्रैल से मंदिर के कपाट आम श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे, जहां नियमित पूजा के लिए दक्षिण भारत के पुरोहितों की व्यवस्था की गई है।

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