विश्व मातृभाषा दिवस के अवसर पर भागलपुर स्थित गांधी शांति प्रतिष्ठान केंद्र में अंगिका साहित्य महोत्सव एवं दानवीर कर्ण राष्ट्रीय सम्मान समारोह का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन युग चेतना फाउंडेशन, अंग-जन-गण, अंग मदद फाउंडेशन और अंगिका सभा फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में हुआ।

 

शहर के प्रख्यात चिकित्सक डॉ. डी.पी. सिंह ने कहा कि अंगिका अंगवासियों की मौलिक भाषा है और इसकी पीड़ा को अंगिकाभाषी ही समझ सकते हैं। उन्होंने दानवीर कर्ण को ज्ञान का प्रतीक बताते हुए कहा कि कोई भी विद्या जाति से नहीं, बल्कि गुण से सम्मान पाती है। उन्होंने लोगों से अपील की कि जहां भी संभव हो, अंगिका में ही संवाद करें ताकि मातृभाषा को सम्मान मिल सके।

 

समाजसेवी डॉ. शंभू दयाल खेतान ने कहा कि विश्वविद्यालयों में अंगिका की पढ़ाई और शोध कार्य हो रहा है, जिससे इसे भविष्य में प्रतिष्ठित मान्यता मिलने की उम्मीद मजबूत हुई है। अध्यक्षीय संबोधन में प्रो. डॉ. रतन कुमार मंडल ने दानवीर कर्ण को अंग क्षेत्र का गौरव बताते हुए जनप्रतिनिधियों से संसद और विधानसभाओं में अंगिका के लिए आवाज उठाने की अपील की।

 

डॉ. मनोज मीता, डॉ. मीरा झा और डॉ. रमेश आत्मविश्वास ने भी अंगिका के संरक्षण और विकास पर जोर दिया। वरिष्ठ साहित्यकार रंजन कुमार ने चिंता जताई कि लोग जनगणना में अंगिका को अपनी मातृभाषा नहीं लिखते, जिससे सरकारी आंकड़ों में इसकी वास्तविक स्थिति सामने नहीं आ पाती।

 

समारोह में विभिन्न क्षेत्रों की विभूतियों को दानवीर कर्ण राष्ट्रीय सम्मान से सम्मानित किया गया। साथ ही पत्रिका “आंगी” और “गांधी दर्शन और विचार” सहित कई पुस्तकों का लोकार्पण किया गया। कार्यक्रम का संचालन पत्रकार प्रसून लतांत ने किया। दूसरे सत्र में कवि सम्मेलन आयोजित हुआ, जिसमें कई कवियों ने अंगिका और हिंदी में काव्य पाठ कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया।

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