भागलपुर, बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू है, लेकिन जमीनी हकीकत एक बार फिर सवालों के घेरे में है। स्मार्ट सिटी के तौर पर पहचान बना रहे भागलपुर से सामने आई ताजा तस्वीरों ने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं।
मामला शहर के उस पॉश इलाके का है, जहां एक ओर कमिश्नर कार्यालय, दूसरी तरफ नगर निगम और ठीक बगल में एसपी कार्यालय स्थित है। इसी हाई-प्रोफाइल क्षेत्र में दिनदहाड़े शराब के नशे में धुत लोग खुलेआम लुढ़कते नजर आए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कुछ लोग कमिश्नरी परिसर के बाहर जमीन पर पड़े हुए थे। आसपास के लोगों ने जब उन्हें वहां से हटाया, तो वे बुरी तरह लड़खड़ाते हुए चलते दिखाई दिए।
नशे की हालत इतनी गंभीर थी कि संभल पाना भी मुश्किल हो रहा था। इसी दौरान किसी ने उन्हें पास की दुकान पर नींबू पानी मिलने की जानकारी दी, जिसके बाद वे वहीं रुककर नींबू पानी पीते नजर आए। यह पूरा दृश्य राहगीरों के बीच चर्चा का विषय बना रहा।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस इलाके में प्रशासन के आला अधिकारियों के दफ्तर मौजूद हों, वहां इस तरह की स्थिति कैसे बन रही है? क्या शराबबंदी कानून सिर्फ कागजों तक सीमित रह गया है? राज्य सरकार द्वारा शराबबंदी को लेकर सख्त कानून बनाए गए हैं और समय-समय पर पुलिस व उत्पाद विभाग की छापेमारी की खबरें भी आती रहती हैं। इसके बावजूद ऐसे दृश्य सामने आना चिंताजनक है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह पहली घटना नहीं है। उनका आरोप है कि अब शाम ही नहीं, बल्कि दिन में भी शराबियों की गतिविधियां बढ़ती जा रही हैं, जिससे महिलाओं और बुजुर्गों को असहजता का सामना करना पड़ता है।
प्रशासन की नाक के नीचे ऐसी घटनाएं होना कानून-व्यवस्था पर सीधा सवाल है। अब देखना यह होगा कि वायरल तस्वीरों के बाद संबंधित अधिकारी क्या कदम उठाते हैं—क्या सख्त कार्रवाई होगी या मामला फिर ठंडे बस्ते में चला जाएगा?
