गोपालगंज/मुंगेर/गया: बिहार में रसोई गैस की कमी के बीच लोग तेजी से एक जैसे चूल्हे की ओर रूख कर रहे हैं. गोपालगंज, एसोसिएट और अन्य सहित कई दुकानों में बिकने वाली चूल्हों की मांग अचानक बढ़ गई है। ऐसे हो गए हैं कि कई इलेक्ट्रॉनिक सुपरमार्केट में उनका स्टॉक ख़त्म हो गया है, जबकि ऑफ़लाइन प्लेटफ़ॉर्म पर भी उनका स्टॉक ख़त्म हो गया है।
असल में पिछले कुछ दिनों से रसोई गैस की दुकान पर लंबी कतारों में पेंटिंग को गैस लगाना पड़ रहा है। कई लोगों को घंटों इंतजार के बाद भी मामा नहीं मिल रहा है। इसी कारण से लोग खाना पकाने के वैकल्पिक साधन के रूप में इनवेस्टर चूल्हे खरीद रहे हैं।
गोपालगंज के घोष मोड़, मुनिया चौक और पुराने चौक जैसे बाजारों में भीड़ उमड़ रही है। सिद्धांत का कहना है कि पिछले चार-पांच दिनों में मांग चार से पांच गुना तक बढ़ गई है। जो पहले 1800 से 2500 रुपये में शुरू हुई थी, अब उसकी कीमत 3000 से 4000 रुपये तक पहुंच गई है।
एक ग्राहक अमन आनंद ने बताया कि पहले उन्होंने ऑनलाइन लाइक्स की कोशिश की थी, लेकिन उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्होंने बाजार से खरीदारी कर ली। उन्होंने बताया कि जो पहले 1500 रुपए के करीब था, उसने अब 3500 रुपए का स्टोर बना लिया है।
असल में 1200 से 2000 वॉट तक के हिसाब से चूल्हों की सबसे ज्यादा मांग है। इनका उपयोग घर के साथ-साथ कैंटीन और ढाबों में भी किया जा सकता है। हल्दी मांग के कारण कई इलेक्ट्रॉनिक्स ने नए ऑर्डर दिए हैं, लेकिन पुरालेख में देरी होने से बाजार में कमी बनी हुई है।
लोगों के मन में बिजली बिल को लेकर अन्य प्रश्न भी हैं। विशेषज्ञ के अनुसार 2000 वॉट का मुख्य सेटिंग पर एक घंटे में करीब दो यूनिट बिजली खर्च होती है। अगर बिजली की कीमत 8 रुपये प्रति यूनिट है तो एक घंटे का खाना पकाने का खर्च करीब 16 रुपये होगा।
वहीं एक घंटे का खाना पकाने में लगभग 21 से 22 रुपये तक का खर्च आता है। ऐसे में इन उदाहरणों में खाना बनाना रेस्तरां के कॉकपिट में करीब 30 से 40 प्रतिशत तक सस्ता पड़ गया है। हालांकि प्रशासन लोगों से गैस को लेकर फेल रही अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील कर रही है।
