सहरसा सदर अस्पताल में बीती मध्य रात्रि उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब डिस्चार्ज को लेकर मरीज के परिजनों और अस्पताल कर्मियों के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई। हंगामे की सूचना मिलते ही हमारे संवाददाता मौके पर पहुंचे, जहां सामने आई तस्वीर ने सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए।

 

मरीज की परिजन पूजा ने गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि उनके एक परिजन की सदर अस्पताल में नॉर्मल डिलीवरी कराई गई, जिसमें एक बच्ची का जन्म हुआ है। डिलीवरी के बाद जब परिजनों ने अस्पताल में मौजूद नर्स और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों से डिस्चार्ज की प्रक्रिया शुरू करने को कहा, तो कथित तौर पर अस्पताल स्टाफ ने प्रत्येक कर्मी के लिए ₹500 की मांग कर दी। परिजनों का आरोप है कि पैसे दिए बिना डिस्चार्ज नहीं करने की बात कही गई।

 

परिजनों ने बताया कि उनके परिवार में पहले से ही चार बेटियां हैं और आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है। ऐसे में उन्होंने सभी कर्मियों को ₹100-₹100 देने की बात कही, ताकि अपनी सामर्थ्य के अनुसार खुशी जाहिर कर सकें। लेकिन इसी बात पर अस्पताल कर्मी नाराज़ हो गए और कथित तौर पर परिजनों को वार्ड से बाहर निकाल दिया गया। आरोप है कि कर्मचारियों ने यह तक कह दिया कि “जब हमारा मन करेगा तभी डिस्चार्ज होगा, नहीं तो नहीं होगा।”

 

घटना के दौरान अस्पताल परिसर में मौजूद अन्य मरीजों के परिजन भी मौके पर इकट्ठा हो गए। कई लोगों ने आरोप लगाया कि सदर अस्पताल में बिना पैसे दिए कोई काम नहीं होता और डिस्चार्ज, दवा या अन्य सुविधाओं के नाम पर अवैध रूप से पैसे मांगे जाते हैं। देखते ही देखते मामला इतना बढ़ गया कि अस्पताल में हंगामे जैसी स्थिति बन गई।

 

हालांकि, इन सभी आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हो पाई है और अस्पताल प्रशासन की ओर से इस मामले पर कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है। लेकिन यह भी सच है कि सहरसा सदर अस्पताल पर इससे पहले भी अवैध वसूली और मरीजों से बदसलूकी के आरोप लगते रहे हैं।

 

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि सामने आए वीडियो और परिजनों के आरोपों के बाद क्या अस्पताल प्रशासन और जिला स्वास्थ्य विभाग इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करेगा, या फिर यह मामला भी पहले की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा। फिलहाल, सहरसा सदर अस्पताल एक बार फिर सवालों के घेरे में है।

By admin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *