पटना के गांधी मैदान में आयोजित कृषि यांत्रिक मेला इन दिनों किसानों और कृषि से जुड़े लोगों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। मेले में आधुनिक कृषि उपकरणों और तकनीकों की झलक देखने को मिल रही है, जो खेती को आसान, सस्ता और अधिक उत्पादक बनाने में सहायक हैं।
मेले में कई कंपनियों और संस्थानों ने अपने स्टॉल लगाए हैं, लेकिन का स्टॉल खास चर्चा में है। यहां विश्वविद्यालय के इंजीनियरिंग विभाग द्वारा विकसित कम लागत वाली मशीनें प्रदर्शित की गई हैं, जिन्हें छोटे और सीमांत किसानों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इनका उद्देश्य श्रम कम करना और उत्पादन बढ़ाना है।
विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक के अनुसार, सभी उपकरण वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की संयुक्त मेहनत का परिणाम हैं। इनमें भिंडी कल्टीवेटर, सेमी-ऑटोमेटेड प्लांटिंग मशीन और गोभी कटाई मशीन प्रमुख हैं।
भिंडी कल्टीवेटर मात्र 300 रुपये की लागत में उपलब्ध है और एक घंटे में लगभग 15 किलो भिंडी की तुड़ाई कर सकता है। इसकी खासियत यह है कि किसान बिना हाथ लगाए भिंडी तोड़ सकते हैं, जिससे खुजली जैसी समस्या से बचाव होता है।
वहीं, सेमी-ऑटोमेटेड प्लांटिंग मशीन करीब 2500 रुपये की है, जो एक घंटे में 360 पौधे लगाने में सक्षम है। यह मशीन गड्ढा बनाकर पौधा लगाती है और मिट्टी बराबर कर देती है, जिससे पौधों को नुकसान नहीं होता और समय व श्रम दोनों की बचत होती है।
इसके अलावा, 8500 रुपये की बैटरी से चलने वाली गोभी कटाई मशीन एक घंटे में लगभग 255 गोभी काट सकती है। यह मशीन कटाई के साथ-साथ गोभी को बॉक्स में भी जमा कर देती है, जिससे किसानों को झुककर काम करने की जरूरत नहीं पड़ती।
विश्वविद्यालय के कुलपति की प्रेरणा से विकसित इन मशीनों का पेटेंट भी संस्थान के पास है। किसान इन्हें सीधे विश्वविद्यालय या उसकी वेबसाइट के माध्यम से खरीद सकते हैं। ये तकनीकें खेती को आधुनिक और लाभकारी बनाने की दिशा में अहम कदम साबित हो रही हैं।
