दुनिया भर में जानवरों से इंसानों में फैलने वाली खतरनाक बीमारियों को रोकने के लिए वैज्ञानिक लगातार नए-नए प्रयोग कर रहे हैं। इसी कड़ी में वैज्ञानिकों ने एक अनोखी तकनीक पर काम शुरू किया है, जिसमें मच्छरों की मदद से चमगादड़ों को वैक्सीन देने की योजना बनाई जा रही है। इस तकनीक का मुख्य उद्देश्य रेबीज़ और निपाह जैसे घातक वायरस के इंसानों तक पहुंचने के खतरे को कम करना है।
वैज्ञानिकों के मुताबिक चमगादड़ कई खतरनाक वायरस के प्राकृतिक वाहक माने जाते हैं। ऐसे में अगर उन्हें ही पहले से वैक्सीनेट कर दिया जाए तो इन वायरस के इंसानों तक पहुंचने की संभावना काफी हद तक कम हो सकती है। इसी सोच के साथ वैज्ञानिकों ने मच्छरों को “वैक्सीन कैरियर” यानी वैक्सीन पहुंचाने वाले माध्यम के रूप में इस्तेमाल करने का प्रयोग किया है।
रिसर्च के दौरान वैज्ञानिकों ने एडीज़ एजिप्टी प्रजाति के मच्छरों को ऐसा खून पिलाया, जिसमें निपाह और रेबीज़ वायरस के खिलाफ वैक्सीन मौजूद थी। यह वैक्सीन मच्छरों के शरीर में पहुंचकर उनकी लार ग्रंथियों तक पहुंच गई। इसके बाद जब ये मच्छर चमगादड़ों को काटते हैं या चमगादड़ इन्हें खा लेते हैं, तो वैक्सीन उनके शरीर में प्रवेश कर जाती है।
लैब में इस तकनीक का परीक्षण चूहों और चमगादड़ों पर किया गया। परीक्षण के दौरान यह पाया गया कि जिन जानवरों तक वैक्सीन पहुंची, उनके शरीर में संबंधित वायरस के खिलाफ एंटीबॉडी बनने लगीं। वैज्ञानिकों का मानना है कि अगर यह तकनीक सफल होती है तो भविष्य में जानवरों से इंसानों में फैलने वाली कई खतरनाक बीमारियों को रोकने में मदद मिल सकती है।
हालांकि कुछ विशेषज्ञ इस तकनीक को लेकर सावधानी बरतने की सलाह भी दे रहे हैं। उनका कहना है कि मच्छरों के जरिए वैक्सीनेशन को नियंत्रित करना मुश्किल हो सकता है, क्योंकि यह तय नहीं किया जा सकता कि मच्छर किसे काटेंगे।
इसी वजह से कुछ वैज्ञानिक एक वैकल्पिक तरीका भी सुझा रहे हैं, जिसमें “ड्रिंक स्टेशन” बनाए जाएं। इन स्टेशनों पर वैक्सीन मिला तरल रखा जाएगा, जिसे चमगादड़ आकर पी सकेंगे।
फिलहाल यह शोध शुरुआती चरण में है, लेकिन वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि भविष्य में यह तकनीक वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए एक बड़ा कदम साबित हो सकती है।
