3 मार्च, मंगलवार को आसमान में दुर्लभ खगोलीय नजारा देखने को मिलेगा। इस दिन पूर्ण चंद्रग्रहण होगा, जिसे खास माना जा रहा है। जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा एक सीध में आ जाते हैं और पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है, तब चंद्रग्रहण होता है। इस दौरान चंद्रमा लाल रंग का नजर आता है, जिसे ‘ब्लड मून’ कहा जाता है।
जानकारी के अनुसार, ग्रहण दोपहर 3:20 बजे शुरू होकर शाम 6:57 बजे तक रहेगा। जैसे-जैसे चंद्रमा पृथ्वी की गहरी छाया में प्रवेश करेगा, उसकी चमक लालिमा में बदलने लगेगी। यदि मौसम साफ रहा तो यह नजारा देश के कई हिस्सों से देखा जा सकेगा। खगोलविदों के मुताबिक पूर्वोत्तर भारत—असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, नागालैंड और मिजोरम—में दृश्यता बेहतर रहेगी। दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और कोलकाता से भी इसे देखा जा सकेगा, हालांकि वहां स्पष्टता थोड़ी कम हो सकती है। इसे देखने के लिए किसी विशेष चश्मे की जरूरत नहीं है और इसका स्वास्थ्य पर कोई दुष्प्रभाव नहीं पड़ता।
वैज्ञानिक दृष्टि से यह एक सामान्य खगोलीय घटना है। पृथ्वी के वायुमंडल से गुजरते समय नीली रोशनी बिखर जाती है, जबकि लाल प्रकाश चंद्रमा तक पहुंचता है। इस प्रक्रिया को ‘रेले प्रकीर्णन’ कहा जाता है, जिससे चंद्रमा लाल या नारंगी दिखाई देता है।
वहीं धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण से नौ घंटे पहले सूतक काल शुरू हो जाता है। इस बार सूतक काल सुबह 9:39 बजे से प्रभावी रहेगा। इस दौरान शुभ कार्य व पूजा-पाठ वर्जित माने जाते हैं। ग्रहण समाप्ति के बाद स्नान, गंगाजल का छिड़काव और दान-पुण्य करने की परंपरा है।
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार सिंह, कन्या और कुंभ राशि वालों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है, जबकि मेष और मिथुन के लिए समय शुभ बताया गया है। हालांकि वैज्ञानिक इसे मात्र खगोलीय घटना मानते हैं।
