बिहार के Jamui में प्रशासनिक लापरवाही और बदहाल ट्रैफिक व्यवस्था की शर्मनाक तस्वीर सामने आई। शहर के बाईपास पर घंटों लगे जाम में एक ऑटो पर सड़ा-गला शव रखा रहा, जिससे उठ रही दुर्गंध से राहगीरों को भारी परेशानी हुई। शव झाझा-जमुई रेल मार्ग के पास मिला था, जिसे पोस्टमार्टम के बाद वापस ले जाया जा रहा था। इसी जाम में एक गंभीर घायल मरीज को लेकर जा रही एंबुलेंस भी फंस गई।
घटना के समय जिले के डीएम, एसपी समेत कई अधिकारी परिसदन में प्रभारी मंत्री Sanjay Singh और सचिव धर्मेंद्र कुमार के स्वागत में व्यस्त थे। वीआईपी ड्यूटी के बीच सड़क पर लगे भारी जाम और उसमें फंसे मरीजों की ओर किसी का ध्यान नहीं गया।
गिद्धौर अस्पताल से रेफर किए गए 22 वर्षीय प्रभात कुमार मिश्रा सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उनके सिर में गंभीर चोट लगी थी और हालत नाजुक बनी हुई थी। एंबुलेंस चालक नवल कुमार सिंह के मुताबिक समय पर अस्पताल पहुंचाना बेहद जरूरी था, लेकिन जाम ने मुश्किलें बढ़ा दीं।
जब प्रशासन मूकदर्शक बना रहा, तब एक स्थानीय रिपोर्टर ने आगे बढ़कर इंसानियत दिखाई। रिपोर्टर खुद सड़क पर उतरा और मशक्कत कर जाम हटवाया। इसके बाद एंबुलेंस किसी तरह सदर अस्पताल पहुंच सकी, जिससे घायल युवक की जान बच सकी।
लेकिन अस्पताल पहुंचने पर परिजनों को एक और झटका लगा। डॉक्टरों ने तुरंत सिटी स्कैन कराने को कहा, मगर दो घंटे इंतजार कराने के बाद बताया गया कि सदर अस्पताल की सिटी स्कैन मशीन पिछले दो दिनों से खराब है। मजबूर होकर परिजन मरीज को निजी सेंटर ले गए।
सिटी स्कैन सेंटर के संचालक निलेश कुमार ने बताया कि मशीन खराब होने की सूचना डीएस, सीएस और जिलाधिकारी को लिखित और मौखिक रूप से दी जा चुकी है, लेकिन अब तक व्यवस्था बहाल नहीं हो सकी है। इस कारण मरीजों को मजबूरी में निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ रहा है।


