नालंदा जिले में साइबर ठगों ने एक बेहद चौंकाने वाली घटना को अंजाम दिया है, जहां हरनौत थाना क्षेत्र के एक 61 वर्षीय रिटायर्ड शिक्षक को 8 दिनों तक “डिजिटल अरेस्ट” में रखकर 6 लाख 20 हजार रुपये की ठगी कर ली गई।
घटना की शुरुआत 31 मार्च की दोपहर हुई, जब पीड़ित कृष्ण कुमार के मोबाइल पर एक अनजान नंबर से कॉल आई। कॉल करने वाले ने खुद को जांच एजेंसी का अधिकारी बताते हुए कहा कि उनका नाम पुलवामा हमले जैसे गंभीर देशद्रोह के मामले से जुड़ा है। यह सुनकर बुजुर्ग घबरा गए। ठगों ने दावा किया कि उनके बैंक खातों की जांच चल रही है और उन्हें तुरंत हिरासत में लिया जा सकता है।
इसके बाद ठगों ने वीडियो कॉल के जरिए उन्हें “डिजिटल अरेस्ट” में रखा। 31 मार्च से 8 अप्रैल तक लगातार 8 दिनों तक उन्हें 24 घंटे निगरानी में रखा गया। ठग कभी सीबीआई अधिकारी तो कभी सुप्रीम कोर्ट का अधिकारी बनकर बात करते रहे। उन्होंने धमकी दी कि अगर कॉल काटी या किसी से संपर्क किया तो तुरंत जेल भेज दिया जाएगा। इस डर के कारण पीड़ित पूरी तरह मानसिक दबाव में आ गए।
ठगों ने विश्वास दिलाया कि जांच के लिए उनके पैसे एक सरकारी खाते में ट्रांसफर करने होंगे, जो बाद में वापस कर दिए जाएंगे। इस झांसे में आकर कृष्ण कुमार ने दो किस्तों में आरटीजीएस के जरिए कुल 6.20 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। बाद में जब ठगों की मांग बढ़ती गई, तब उन्हें धोखे का एहसास हुआ।
इसके बाद पीड़ित ने नालंदा साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामला दर्ज कर मोबाइल नंबर और बैंक खातों की जांच शुरू कर दी है।
साइबर डीएसपी राघवेंद्र मनी त्रिपाठी ने स्पष्ट कहा कि “डिजिटल अरेस्ट” जैसी कोई कानूनी व्यवस्था नहीं है। यह ठगों का नया तरीका है। उन्होंने लोगों से अपील की कि ऐसी किसी भी कॉल से घबराएं नहीं और तुरंत हेल्पलाइन 1930 पर सूचना दें।
यह घटना बताती है कि साइबर ठगी के बढ़ते मामलों के बीच सतर्क रहना बेहद जरूरी है।
