सहरसा सदर अस्पताल में पत्रकार से कथित मारपीट, 48 घंटे में गिरफ्तारी नहीं तो सहरसा बंद का ऐलान

सहरसा। सहरसा सदर अस्पताल में शनिवार को खबर संकलन के दौरान डिजिटल मीडिया के पत्रकार अभिषेक कुमार के साथ कथित मारपीट का मामला सामने आया है। पत्रकार ने अस्पताल प्रबंधन, डॉक्टर एसके आजाद, अस्पताल मैनेजर सिंपी कुमारी समेत कुछ पैरामेडिकल छात्रों और अस्पताल कर्मियों पर मारपीट का आरोप लगाया है। घटना के बाद पत्रकारों में आक्रोश है और मामले में निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की जा रही है।

 

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दरअसल, बनगांव थाना क्षेत्र के उत्क्रमित मध्य विद्यालय वासुदेवा में शनिवार को मध्यान्ह भोजन में मरी हुई छिपकली मिलने की सूचना सामने आई थी। भोजन करने के बाद करीब दो दर्जन बच्चों की तबीयत बिगड़ने की बात कही गई, जिसके बाद सभी बच्चों को इलाज के लिए सहरसा सदर अस्पताल लाया गया। घटना की जानकारी मिलने पर बड़ी संख्या में पत्रकार अस्पताल पहुंचे थे।

 

इसी दौरान खबर की कवरेज और पीटीसी करने के दौरान पत्रकार अभिषेक कुमार की डॉक्टर एसके आजाद से बहस हो गई। पत्रकार का आरोप है कि विवाद बढ़ने के बाद डॉक्टर, पैरामेडिकल छात्र और अस्पताल के कुछ कर्मियों ने उनके साथ मारपीट शुरू कर दी। अभिषेक कुमार के मुताबिक उनके साथ करीब 20 मिनट तक मारपीट की गई, जिसमें वे घायल हो गए। इसके बाद उन्हें इलाज के लिए नारायण अस्पताल ले जाया गया।

 

घटना के बाद पत्रकार सदर थाना पहुंचे और संबंधित लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर कार्रवाई की मांग की। वहीं, पत्रकारों ने भी मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।

 

सिविल सर्जन ने कहा—जांच जारी

 

सिविल सर्जन डॉ. राज नारायण ने बताया कि घटना के समय वे दिशा की बैठक में शामिल थे। इसी दौरान जिलाधिकारी को बच्चों के बीमार होने की सूचना मिली, जिसके बाद वे सदर अस्पताल पहुंचे। उन्होंने कहा कि अस्पताल में जानकारी लेने के दौरान एक पत्रकार द्वारा सवाल पूछे जाने और कथित अमर्यादित भाषा के इस्तेमाल के बाद विवाद की स्थिति बनी। सिविल सर्जन ने कहा कि पूरे मामले की जांच की जा रही है और जांच के बाद दोषियों पर कार्रवाई होगी।

 

48 घंटे में गिरफ्तारी नहीं तो सहरसा बंद का ऐलान

 

पत्रकारों ने ऐलान किया है कि यदि अस्पताल मैनेजर सिंपी कुमारी समेत मारपीट में शामिल बताए जा रहे लोगों की 48 घंटे के भीतर गिरफ्तारी नहीं होती और सहरसा के सिविल सर्जन का स्थानांतरण नहीं किया जाता है, तो सहरसा बंद का आह्वान किया जाएगा।

 

फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है। अस्पताल प्रबंधन और संबंधित डॉक्टर का विस्तृत पक्ष तथा जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही पूरे विवाद की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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