धनबाद। कतरास के सिजुआ 10 नंबर इलाके में मंगलवार तड़के करीब 5 बजे अचानक जमीन धंसने से बड़ा हादसा हो गया। घटना के वक्त अधिकांश लोग अपने घरों में सो रहे थे। अचानक जमीन में दरार पड़ने और तेज आवाज के साथ कई घर भरभराकर ढह गए। हादसे के बाद इलाके में अफरातफरी मच गई।
घरों के मलबे में कुछ लोगों के दबे होने की सूचना मिलते ही स्थानीय लोग राहत और बचाव में जुट गए। लोगों ने किसी तरह मलबे में फंसे लोगों को बाहर निकाला। घटना में दो बच्चों और छह महिलाओं समेत करीब आठ लोगों के घायल होने की बात सामने आई है। घायलों को इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया। वहीं, मलबे में दबे एक बच्चे की मौत होने की भी सूचना है।
घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल है। कतरास और झरिया क्षेत्र में लगातार हो रही भू-धंसान की घटनाओं ने एक बार फिर कोयलांचल में रह रहे लोगों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कुछ समय पहले कतरास के छाताबाद में भी भू-धंसान की बड़ी घटना सामने आई थी। घटना के बाद जनप्रतिनिधियों और नेताओं के साथ सरकार के मंत्री भी मौके पर पहुंचे थे। प्रभावित क्षेत्रों का सर्वे कराने और लोगों के पुनर्वास की बात कही गई थी, लेकिन इसके बावजूद भू-धंसान की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं।
कोयलांचल का बड़ा हिस्सा भूमिगत खनन और पुराने खनन क्षेत्रों से प्रभावित माना जाता है। कई स्थानों पर पहले कोलियरी संचालित होती थी, जबकि कुछ इलाकों में अवैध उत्खनन के दौरान सुरंग बनाकर जमीन को खोखला किए जाने की बात भी सामने आती रही है। ऐसे क्षेत्रों में जमीन धंसने का खतरा लगातार बना रहता है।
प्रभावित लोगों के पुनर्वास की जिम्मेदारी बीसीसीएल और जरेडा के पास है। बीसीसीएल अपने कर्मियों को पुनर्वासित करता है, जबकि गैर-कर्मियों के पुनर्वास की जिम्मेदारी जरेडा की है। बावजूद इसके कई डेंजर जोन में लोग अब भी रहने को मजबूर हैं।
सिजुआ की घटना ने एक बार फिर सवाल खड़ा किया है कि आखिर डेंजर जोन में रह रहे लोगों को सुरक्षित स्थान पर कब तक पहुंचाया जाएगा और भू-धंसान का स्थायी समाधान कब होगा?






