जब भी ‘जयपुर’ नाम सुनाई देता है, लोगों के मन में राजस्थान की गुलाबी नगरी की तस्वीर उभर आती है. लेकिन बिहार के गया जिले में भी एक ऐतिहासिक ‘जयपुर’ गांव मौजूद है, जिसका संबंध सीधे महाराणा प्रताप के वंशजों से जुड़ा बताया जाता है. गया के गुरुआ प्रखंड स्थित नगमा गढ़ क्षेत्र का यह गांव आज अपने इतिहास के साथ-साथ तेज विकास कार्यों को लेकर चर्चा में है.
मान्यता है कि सैकड़ों साल पहले महाराणा प्रताप के वंशज राजस्थान के जयपुर से यहां आकर बसे थे. उसी याद में इस गांव का नाम ‘जयपुर’ रखा गया. आज भी यहां सिसोदिया राजपूत परिवार रहते हैं और गया गजेटियर में भी इस गांव का उल्लेख मिलता है.
कभी बिजली, सड़क और बुनियादी सुविधाओं के अभाव से जूझने वाला यह इलाका अब तेजी से स्मार्ट विलेज में बदल रहा है. जयपुर के साथ नदौरा, सरईटांड़, नगमा समेत पांच गांवों में एसबीआई फाउंडेशन के सहयोग से बड़े पैमाने पर विकास कार्य किए जा रहे हैं. ‘एसबीआई ग्राम सेवा कार्यक्रम’ के तहत सहभागी शिक्षण केंद्र गांवों में शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं पर काम कर रहा है.
गांवों में आधुनिक बस पड़ाव, अस्पताल, यात्री शेड, स्वच्छ पेयजल और 24 घंटे एंबुलेंस सेवा उपलब्ध कराई गई है. पशुपालकों के लिए पशु चिकित्सा वाहिनी भी चलाई जा रही है. सरकारी स्कूलों को स्मार्ट क्लास, कंप्यूटर लैब, विज्ञान प्रयोगशाला और गर्ल्स कॉमन रूम से लैस किया जा रहा है. युवाओं के लिए ओपन जिम और सेना भर्ती प्रशिक्षण की व्यवस्था भी की गई है.
महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सिलाई प्रशिक्षण केंद्र खोले गए हैं, जबकि विधवा महिलाओं को मुफ्त बकरियां दी जा रही हैं. स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि गांव में पहली बार जमीन पर इतना बड़ा बदलाव दिखाई दे रहा है.
सहभागी शिक्षण केंद्र के संस्थापक निदेशक अशोक कुमार सिंह के मुताबिक, जनभागीदारी और डिजिटल क्रांति के जरिए इन गांवों को आधुनिक और आत्मनिर्भर बनाने का काम लगातार जारी है.


