बिहार के नालंदा जिले से भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई सामने आई है। निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने राजगीर थाना में तैनात पुलिस अवर निरीक्षक (SI) देवकांत कुमार को 90 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। इस कार्रवाई से पूरे पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। गिरफ्तार आरोपी को पटना ले जाकर आगे की पूछताछ की जा रही है।

मामला एक डॉक्टर, रविशंकर सिंह से जुड़ा है, जिन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें झूठे आर्म्स एक्ट केस में फंसाया गया था। 31 मार्च 2026 को गांव में बच्चों के विवाद के बाद दोनों पक्षों को मेडिकल जांच के लिए राजगीर अनुमंडलीय अस्पताल भेजा गया था। वहां स्थिति बिगड़ने पर डॉक्टर ने अपनी लाइसेंसी पिस्टल हवा में लहराई, जिसके आधार पर उन पर मामला दर्ज कर उन्हें जेल भेज दिया गया।

डॉक्टर के अनुसार, जेल से छूटने के बाद केस के जांच अधिकारी SI देवकांत कुमार ने उनसे संपर्क किया और लाइसेंसी पिस्टल छुड़ाने व लाइसेंस रद्द न होने देने के बदले 1 लाख रुपये की मांग की। बाद में सौदा 90 हजार रुपये में तय हुआ। इससे पहले आरोपी 20 हजार रुपये ले चुका था।

इससे परेशान होकर डॉक्टर ने पटना स्थित निगरानी विभाग में शिकायत दर्ज कराई। प्रारंभिक जांच में आरोप सही पाए जाने पर टीम का गठन किया गया। तय योजना के तहत आरोपी ने डॉक्टर को राजगीर के एक सुनसान इलाके में पैसे लेकर बुलाया, जहां पहले से सादे लिबास में मौजूद टीम ने उसे रिश्वत लेते ही दबोच लिया।

निगरानी विभाग के अधिकारी श्रीराम चौधरी ने बताया कि आरोपी को रंगे हाथ पकड़ा गया है और मामले की जांच जारी है। इस कार्रवाई के बाद स्थानीय लोगों ने राहत जताई है, वहीं पुलिस विभाग में बढ़ते भ्रष्टाचार को लेकर सवाल भी उठने लगे हैं।

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