पटना में सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। पूर्व राज्यसभा सांसद ने मुख्यमंत्री पर बेहद तीखा हमला बोला है। सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए उन्होंने नीतीश कुमार के नेतृत्व और उनके राजनीतिक फैसलों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
शिवानंद तिवारी ने लिखा कि नीतीश कुमार कभी भी चुनौतियों का डटकर सामना करने वाले नेता नहीं बन पाए। उनके मुताबिक, कठिन परिस्थितियों में वे हमेशा अपना रास्ता बदल लेते हैं, बजाय सीधे खड़े होकर मुकाबला करने के। उन्होंने कहा कि बड़े फैसलों के समय जिस दृढ़ता और साहस की जरूरत होती है, वह नीतीश कुमार में दिखाई नहीं देती।
तिवारी ने नीतीश कुमार के पुराने वादों की भी याद दिलाई। उन्होंने कहा कि सत्ता में आने के बाद नीतीश कुमार ने ‘भूमि सुधार लागू करने’ और ‘सभी बच्चों के लिए समान शिक्षा व्यवस्था’ जैसे बड़े संकल्प लिए थे, लेकिन ये दोनों ही मुद्दे समय के साथ फाइलों में दबकर रह गए। उनका आरोप है कि इन योजनाओं को लागू करने के लिए जरूरी राजनीतिक इच्छाशक्ति का अभाव साफ दिखा।
इसके साथ ही तिवारी ने वैचारिक बदलाव को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कभी नीतीश कुमार ‘आरएसएस मुक्त भारत’ की बात करते थे और के खिलाफ महागठबंधन बनाने की कोशिश करते थे। लेकिन आज वही नेता बीजेपी को सत्ता सौंपने की स्थिति में हैं, जो उनके वैचारिक आत्मसमर्पण को दर्शाता है।
शिवानंद तिवारी ने नीतीश कुमार के व्यक्तित्व पर भी तीखा प्रहार करते हुए कहा कि उनमें ‘रीढ़ की कमी’ है, जिसकी वजह से वे हर मुश्किल समय में समझौते का रास्ता चुनते हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि नीतीश कुमार सीधे टकराव से बचते हैं और असहमति रखने वालों को किनारे कर देते हैं।
अंत में तिवारी ने जॉर्ज फर्नांडिस, शरद यादव और दिग्विजय सिंह जैसे नेताओं का जिक्र करते हुए नीतीश कुमार पर पुराने साथियों के साथ ‘धोखा’ करने का आरोप भी लगाया।
