पटना में अति पिछड़ा वोट बैंक को साधने की कोशिशों के बीच सियासी हलचल तेज हो गई है। लंबे समय तक इस वर्ग पर पकड़ रखने वाले के बाद यह समीकरण के पक्ष में जाता दिखा, लेकिन अब उनके संभावित एग्जिट प्लान की चर्चाओं के बीच महागठबंधन फिर से इस वोट बैंक में सेंधमारी की रणनीति पर काम कर रहा है।
इसी कड़ी में पटना के बापू सभागार में अति पिछड़ा सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन आईआईपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और सहरसा विधायक आईपी गुप्ता के स्थापना दिवस पर किया गया था। इस सम्मेलन में मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुए, लेकिन कांग्रेस नेता और भाकपा माले के गैरमौजूदगी ने राजनीतिक संदेश दे दिया।
राजनीतिक गलियारों में यह माना जा रहा था कि राहुल गांधी की मौजूदगी से आरजेडी और कांग्रेस के बीच दूरी कम हो सकती है, लेकिन उनके नहीं आने से यह कोशिश कमजोर पड़ती दिखी। उनकी जगह कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मदन मोहन झा ने कार्यक्रम में भाग लिया।
मंच से तेजस्वी यादव ने सामाजिक न्याय और आरक्षण के मुद्दे पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने कहा कि अति पिछड़े समाज के अधिकारों के लिए उनकी पार्टी हर लड़ाई लड़ेगी। साथ ही उन्होंने 2025 के चुनाव परिणामों पर सवाल उठाते हुए ईवीएम को लेकर भी आरोप लगाए और इसे “मशीन तंत्र और धनतंत्र की जीत” बताया।
वहीं, आईपी गुप्ता ने भी आरक्षण को लेकर आक्रामक रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि केवल बातों से नहीं, बल्कि ताकत दिखाकर अधिकार लेना होगा। उन्होंने अति पिछड़ा समाज से एकजुट होकर अपने हक की लड़ाई लड़ने की अपील की।
वरिष्ठ पत्रकार कौशलेंद्र प्रियदर्शी का मानना है कि अति पिछड़ा वोट बैंक को लेकर सभी दलों में खींचतान जारी है। महागठबंधन को उम्मीद है कि नीतीश कुमार की गैरमौजूदगी में उसे फायदा मिल सकता है, लेकिन बड़े नेताओं की अनुपस्थिति से इस सम्मेलन का असर सीमित रह सकता है।
