जामताड़ा जिले के फतेहपुर प्रखंड अंतर्गत बामनडीहा पंचायत के बाबुडीह गांव में सरकारी योजना के तहत लगाए गए काजू के पेड़ आज उपेक्षा का शिकार होते नजर आ रहे हैं। एक ओर जहां सरकार किसानों की आय बढ़ाने के लिए बागवानी योजनाओं को बढ़ावा दे रही है, वहीं दूसरी ओर जमीनी स्तर पर इन योजनाओं की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
ग्रामीणों के अनुसार, गांव में लगाए गए काजू के पेड़ों में हर साल अच्छी मात्रा में फल लगते हैं, लेकिन उचित देखभाल और निगरानी के अभाव में यह फसल समय से पहले ही नष्ट हो जाती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पेड़ों की सुरक्षा के लिए कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई है, जिसके कारण आसपास के बच्चे कच्चे काजू को ही तोड़ देते हैं। इससे फल पकने से पहले ही बर्बाद हो जाते हैं और किसानों को संभावित आय से हाथ धोना पड़ता है।
ग्रामीणों ने बताया कि अगर इन पेड़ों की सही तरीके से देखभाल की जाए और सुरक्षा के लिए कोई जिम्मेदार व्यवस्था बनाई जाए, तो यह काजू बागान गांव के लोगों के लिए आय का एक मजबूत स्रोत बन सकता है। लेकिन वर्तमान हालात में पेड़ होने के बावजूद उनका कोई लाभ ग्रामीणों को नहीं मिल पा रहा है।
यह स्थिति सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर भी सवाल खड़े करती है। जब पौधारोपण किया गया था, तब क्या उनकी सुरक्षा और रखरखाव के लिए कोई ठोस योजना नहीं बनाई गई थी? क्या संबंधित विभाग की जिम्मेदारी केवल पौधे लगाने तक ही सीमित रह गई है?
अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या जिला प्रशासन इस गंभीर समस्या पर संज्ञान लेता है और काजू के इन पेड़ों की सुरक्षा व देखरेख के लिए ठोस कदम उठाता है, या फिर हर साल की तरह इस बार भी काजू की फसल यूं ही बर्बाद होती रहेगी।
