भागलपुर जिले के बिहपुर प्रखंड अंतर्गत अमरपुर गांव में स्वास्थ्य उपकेंद्र की जमीन को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। रविवार को ग्रामीणों और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने एकजुट होकर जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। आरोप है कि स्वास्थ्य उपकेंद्र के लिए दान की गई जमीन पर बिना एनओसी पंचायत सरकार भवन का निर्माण कराया जा रहा है, जिसे लेकर लोगों में भारी आक्रोश है।

 

धरना की अध्यक्षता राजीव सनगही ने की, जबकि संचालन रौशन सनगही द्वारा किया गया। धरना स्थल पर बड़ी संख्या में जुटे ग्रामीणों ने बताया कि वर्ष 1960 में गांव के लोगों ने स्वास्थ्य सुविधा के विस्तार के लिए बिहार के राज्यपाल के नाम एक एकड़ 82 डिसमील जमीन दान दी थी। अब उसी जमीन का उपयोग किसी अन्य निर्माण के लिए किया जाना न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि ग्रामीणों की भावनाओं के साथ भी खिलवाड़ है।

 

प्रदर्शनकारियों ने साफ कहा कि उन्हें विकास कार्यों से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन अस्पताल की जमीन पर किसी अन्य भवन का निर्माण किसी भी हाल में स्वीकार नहीं किया जाएगा। ग्रामीणों ने अधिकारियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब प्रशासन दावा करता है कि जमीन अतिक्रमित नहीं है, तो फिर निर्माण से संबंधित पत्र क्यों जारी किया गया।

 

धरना के दौरान वक्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही इस मामले में ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन को प्रखंड से जिला और राज्य स्तर तक चरणबद्ध तरीके से तेज किया जाएगा। साथ ही, स्वास्थ्य उपकेंद्र की जमीन का सीमांकन कर उसे अतिक्रमण मुक्त कराने की मांग भी उठाई गई।

 

बताया गया कि यह उपकेंद्र आसपास की तीन से चार पंचायतों के लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करता है। ऐसे में यहां किसी अन्य निर्माण से क्षेत्र की चिकित्सा व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका है।

 

धरना को संबोधित करते हुए भाजपा नेता विपुल चौधरी उर्फ दल्लू चौधरी ने भावुक बयान देते हुए कहा कि “अस्पताल यहां से नहीं जाएगा, अगर ऐसा हुआ तो मैं आत्मदाह कर लूंगा।” उनके इस बयान के बाद माहौल और अधिक संवेदनशील हो गया।

 

फिलहाल, अमरपुर की जनता की नजरें प्रशासन पर टिकी हैं। अब देखना होगा कि इस विवाद का समाधान कितनी जल्दी निकलता है।

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