पटना में 12 अप्रैल को होने वाला ‘पान महासम्मेलन’ बिहार की सियासत में बड़ा मोड़ ला सकता है। एक ओर के संभावित इस्तीफे और एनडीए में नेतृत्व बदलाव की चर्चा है, वहीं दूसरी ओर महागठबंधन अति पिछड़ा वर्ग (EBC) के 36 प्रतिशत वोट बैंक पर मजबूत पकड़ बनाने की रणनीति में जुट गया है।
इस सम्मेलन में राहुल गांधी तेजस्वी यादव और दीपंकर भट्टाचार्य एक मंच पर नजर आएंगे। इसे विपक्षी एकता के शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है। कार्यक्रम का आयोजन इंडियन इंक्लूसिव पार्टी के अध्यक्ष कर रहे हैं, जिनकी पान समाज में मजबूत पकड़ मानी जाती है।
दरअसल, बिहार में EBC वर्ग सबसे बड़ा वोट बैंक है, जिसमें 100 से अधिक जातियां शामिल हैं। पान समाज (तांती-तंतवा) की आबादी करीब 22 लाख यानी 2 प्रतिशत है, जो खासकर कोसी-मिथिलांचल क्षेत्र में निर्णायक भूमिका निभाती है। यही वजह है कि इस सम्मेलन को सामाजिक नहीं, बल्कि सियासी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह आयोजन कांग्रेस और आरजेडी के बीच आई तल्खी को कम करने और आगामी चुनावों के लिए साझा रणनीति बनाने का मंच बन सकता है। साथ ही, यह संदेश देने की कोशिश भी है कि महागठबंधन EBC समाज को अपने साथ जोड़ने के लिए गंभीर है।
इधर, आई पी गुप्ता का दावा है कि अगर जदयू में नेतृत्व को लेकर असंतोष बढ़ता है, तो पार्टी में टूट की स्थिति बन सकती है। ऐसे में EBC वोट बैंक महागठबंधन की ओर झुक सकता है।
कुल मिलाकर, पटना का यह सम्मेलन बिहार की राजनीति में नई दिशा तय कर सकता है। अब नजर इस बात पर है कि क्या यह शक्ति प्रदर्शन EBC समाज को प्रभावित कर पाएगा और राज्य की सियासत किस ओर करवट लेगी।
