धनबाद शहर के टाउन हॉल में आज शिक्षा के क्षेत्र में एक अहम पहल देखने को मिली, जहां ‘स्कूल रुआर’ यानी ‘स्कूल वापसी’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य जिले की बिगड़ी शिक्षा व्यवस्था को पटरी पर लाना और पढ़ाई छोड़ चुके बच्चों को दोबारा स्कूल तक पहुंचाना है।
इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में जिले के उपायुक्त आदित्य रंजन, विधायक राज सिन्हा और महापौर संजीव सिंह सहित शिक्षा विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों ने शिक्षा को लेकर अपनी प्रतिबद्धता जताई और ड्रॉपआउट बच्चों को दोबारा स्कूल से जोड़ने के लिए ठोस रणनीति पर चर्चा की।
उपायुक्त आदित्य रंजन ने अपने संबोधन में स्पष्ट कहा कि अब जिले में कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित नहीं रहेगा। उन्होंने बताया कि ड्रॉपआउट बच्चों को चिन्हित कर उन्हें फिर से स्कूल में दाखिला दिलाना प्रशासन की प्राथमिकता है। इसके लिए प्रखंड स्तर पर अधिकारियों को विशेष प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है, ताकि जमीनी स्तर पर इस अभियान को प्रभावी तरीके से लागू किया जा सके।
शिक्षा विभाग का फोकस सिर्फ नामांकन तक सीमित नहीं है, बल्कि स्कूलों में ऐसा सकारात्मक और आकर्षक माहौल तैयार करने पर भी है, जिससे बच्चे पढ़ाई के लिए खुद प्रेरित हों और नियमित रूप से स्कूल आएं।
हालांकि, कार्यक्रम के दौरान जनप्रतिनिधियों ने इस पहल की सराहना करते हुए कुछ गंभीर मुद्दे भी उठाए। विधायक और महापौर ने स्कूलों में शिक्षकों की कमी, जर्जर भवन और बुनियादी सुविधाओं की कमी की ओर ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि जब तक इन समस्याओं का समाधान नहीं किया जाएगा, तब तक शिक्षा व्यवस्था में स्थायी सुधार संभव नहीं है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि ‘स्कूल वापसी’ अभियान जमीनी स्तर पर कितना असर दिखा पाएगा। क्या यह पहल उन बच्चों का भविष्य बदल पाएगी जो किसी कारणवश स्कूल से दूर हो चुके हैं?
फिलहाल प्रशासन ने अपनी मंशा साफ कर दी है। अब नजर इस बात पर टिकी है कि यह अभियान धरातल पर कितनी मजबूती से लागू होता है और बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा में वापस लाने में कितना सफल होता है।
