सहरसा नगर निगम की लापरवाही एक बार फिर सामने आई है। गोबरगढ़ा वार्ड नंबर-2 में बनाए गए कचरा डंपिंग स्थल ने स्थानीय लोगों की ज़िंदगी को नारकीय बना दिया है। यहां रहने वाले करीब 1000 से 1200 लोगों को हर दिन धुएं, बदबू और गंदगी के बीच जीने को मजबूर होना पड़ रहा है।
सहरसा जिले के गोबरगढ़ा वार्ड नंबर-2 में नगर निगम द्वारा कचरा डंपिंग स्थल बनाया गया है। इस डंपिंग यार्ड के बिल्कुल बगल में बड़ी आबादी निवास करती है, जहां लगभग एक हजार से अधिक लोग रहते हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यहां आए दिन कचरे के ढेर में आग लगा दी जाती है, जिससे उठने वाला जहरीला धुआं पूरे इलाके में फैल जाता है।
ग्रामीणों का कहना है कि इस धुएं के कारण सांस लेना तक मुश्किल हो गया है। बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को खास तौर पर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। चारों ओर फैली दुर्गंध के कारण खाना-पीना भी दूभर हो गया है। लोगों का कहना है कि उनका जीवन पूरी तरह से प्रभावित हो चुका है और वे मजबूरी में इस स्थिति को झेल रहे हैं।
स्थानीय निवासियों ने बताया कि कुछ दिन पहले जिलाधिकारी मौके पर पहुंचे थे। उस दौरान लोगों ने अपनी समस्याएं रखीं, जिस पर जिलाधिकारी ने डंपिंग स्थल के चारों ओर चारदीवारी बनाने का आश्वासन दिया था। लेकिन समय बीतने के बावजूद अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
लोगों का आरोप है कि प्रशासन की ओर से केवल आश्वासन दिए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई काम नहीं होता। इससे लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है और वे खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।
अब सवाल यह उठता है कि आखिर कब तक गोबरगढ़ा के लोग इस जहरीले माहौल में जीने को मजबूर रहेंगे? क्या प्रशासन जल्द कोई ठोस कदम उठाएगा या फिर लोगों की परेशानियां यूं ही जारी रहेंगी—यह देखने वाली बात होगी।
