सीतामढ़ी से एक राहत भरी खबर सामने आई है, जहां बिहार पुलिस के विशेष अभियान ‘ऑपरेशन नया सवेरा 2.0’ के तहत एक नाबालिग लड़की को सुरक्षित रेस्क्यू कर उसके परिवार से मिलाया गया है। यह कार्रवाई मानव तस्करी और शोषण के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान का हिस्सा है।

 

जानकारी के अनुसार, लड़की के पिता ने पुलिस अधीक्षक अमित रंजन को सूचना दी थी कि उनकी बेटी करीब दो साल से लापता है और गलत परिस्थितियों में फंसी हुई है। सूचना मिलते ही पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए त्वरित कार्रवाई शुरू की।

 

वरीय पुलिस उपाधीक्षक (मुख्यालय) सह एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट के नोडल पदाधिकारी मो. नजीब अनवर के निर्देशन में एक संयुक्त टीम का गठन किया गया। इस टीम में एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट, नगर थाना, महिला थाना, एससी-एसटी थाना और एक सामाजिक संस्था के सदस्य शामिल थे। पुलिस निरीक्षक सुशील कुमार सिंह के नेतृत्व में टीम ने निर्धारित स्थान पर छापेमारी कर नाबालिग को सुरक्षित बाहर निकाला।

 

रेस्क्यू के बाद बच्ची की काउंसलिंग कराई गई, जिसमें सामने आया कि उसे दो साल पहले नौकरी का झांसा देकर वहां ले जाया गया था और उसकी इच्छा के विरुद्ध रखा गया। फिलहाल उसे सुरक्षित माहौल में रखा गया है और आवश्यक सहायता दी जा रही है।

 

इस मामले में पुलिस ने दो आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली है और आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।

 

सबसे भावुक क्षण तब आया जब दो साल बाद बच्ची अपने पिता से मिली। इस दौरान परिवार की भावनाएं देखने लायक थीं।

 

इस अभियान में महिला थाना, बाल संरक्षण से जुड़े अधिकारी और अन्य संबंधित विभागों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

 

बिहार पुलिस की इस कार्रवाई को एक बड़ी मानवीय पहल के रूप में देखा जा रहा है, जो समाज में जागरूकता और सुरक्षा का संदेश देती है।

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