नालंदा के राजगीर की पहचान बन चुका ‘राजधानी टमटम’ आज उदासी में डूबा है। वजह है बिहार के मुख्यमंत्री के दिल्ली जाने की अटकलें। इस टमटम के चालक दिलीप यादव, जो साल 1996 से घोड़ा गाड़ी चला रहे हैं, अपने “राजा साहब” को याद कर भावुक हो उठे हैं।
दिलीप बताते हैं कि जब भी नीतीश कुमार राजगीर आते थे, तो प्रशासन से फोन आता था—“टमटम तैयार रखो।” वह अपनी गाड़ी को दुल्हन की तरह सजाकर तैयार करते और ‘रानी’ नाम की घोड़ी के साथ मुख्यमंत्री को राजगीर घुमाते। उनके लिए यह सिर्फ काम नहीं, बल्कि गर्व और सम्मान की बात थी।
लेकिन अब हालात बदल गए हैं। दिलीप कहते हैं, “आज वो दिल्ली जा रहे हैं और मुझे भूल गए। मेरे आंसू पोछने वाला कोई नहीं है।”
दिलीप यादव का एक दिलचस्प ‘लालू कनेक्शन’ भी है। वे बताते हैं कि साल 2004 में की रैली के लिए उनसे 100 टमटम मांगे गए थे। लेकिन उन्होंने साफ इनकार कर दिया, क्योंकि नेताओं ने किसी हादसे की जिम्मेदारी लेने से मना कर दिया था। उसी दिन से उन्होंने दूरी बना ली।
इसके बाद 2005 में जेडीयू के कार्यक्रम के दौरान मंत्री श्रवण कुमार के कहने पर उन्होंने नीतीश कुमार के लिए टमटम चलाना शुरू किया और 2022 तक यह सिलसिला चलता रहा।
अब जब नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की चर्चा है, दिलीप और टमटम यूनियन के लोग चाहते हैं कि वे बिहार न छोड़ें। अगर जाते हैं, तो अपने बेटे निशांत कुमार को मुख्यमंत्री बनाकर जाएं।
दिलीप की आखिरी ख्वाहिश भी सामने आई—“एक बार नीतीश जी से मिलना चाहते हैं। जैसे पिता को घुमाया, वैसे ही निशांत बाबू को भी अपने टमटम पर बैठाकर पूरा राजगीर घुमाना चाहता हूं।”
राजगीर का यह टमटम सिर्फ सवारी नहीं, बल्कि एक भावनात्मक रिश्ता बन चुका है, जो अब टूटता नजर आ रहा है।
