सारण जिले में निजी स्कूलों की मनमानी और अभिभावकों के आर्थिक शोषण पर जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले किसी भी निजी विद्यालय को बख्शा नहीं जाएगा और उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
डीएम ने बिहार निजी विद्यालय (शुल्क विनियमन) अधिनियम, 2019 का हवाला देते हुए कहा कि कोई भी निजी स्कूल अभिभावकों से री-एडमिशन फीस, वार्षिक अतिरिक्त शुल्क या अन्य किसी नाम पर अवैध वसूली नहीं कर सकता। इसके साथ ही स्कूलों को यह भी निर्देश दिया गया है कि वे छात्रों के अभिभावकों को किसी विशेष दुकान से किताबें, कॉपी या यूनिफॉर्म खरीदने के लिए बाध्य नहीं करेंगे।
प्रशासन की ओर से यह भी साफ किया गया है कि सभी निजी विद्यालय 15 अप्रैल 2026 तक अपनी-अपनी कक्षाओं की पुस्तक सूची और यूनिफॉर्म का पूरा विवरण अपनी आधिकारिक वेबसाइट या स्कूल के सूचना पट्ट पर सार्वजनिक करें। इसके अलावा, एक बार तय की गई यूनिफॉर्म में कम से कम तीन वर्षों तक कोई बदलाव नहीं किया जाएगा, ताकि अभिभावकों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ न पड़े।
इस आदेश के पालन को सुनिश्चित करने के लिए प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों को नोडल अधिकारी बनाया गया है। उन्हें सभी निजी स्कूलों का औचक निरीक्षण करने का निर्देश दिया गया है। निरीक्षण के दौरान स्कूलों की फीस संरचना, रसीद व्यवस्था, री-एडमिशन शुल्क और अन्य संबंधित शिकायतों की गहन जांच की जाएगी।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि यदि किसी स्कूल में नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो न सिर्फ अवैध रूप से वसूली गई राशि अभिभावकों को वापस कराई जाएगी, बल्कि संबंधित विद्यालय को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया जाएगा। गंभीर मामलों में स्कूल की मान्यता निलंबित या रद्द करने तक की कार्रवाई की जा सकती है।
प्रशासन की इस सख्ती से अभिभावकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है और निजी स्कूलों में पारदर्शिता व जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में यह एक अहम कदम माना जा रहा है।
